
डोईवाला: सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर संगठन डोईवाला की मासिक बैठक आंगनबाड़ी केंद्र कान्हरवाला में आयोजित हुई, जिसमें पेंशन और चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़े मुद्दों को लेकर नाराज़गी सामने आई। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी डोईवाला द्वारा कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन सेवानिवृत्ति के एक साल बाद भी नहीं लगाई गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य प्रतिपूर्ति से जुड़े बिल भी संबंधित प्राधिकरण को नहीं भेजे जा रहे हैं, जिससे बुजुर्ग पेंशनरों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाएं जीवनयापन का मुख्य आधार होती हैं। समय पर पेंशन न मिलने और चिकित्सा प्रतिपूर्ति में देरी को लेकर पहले भी पेंशनर संगठनों ने विभिन्न मंचों पर चिंता जताई है। डोईवाला क्षेत्र में यह मुद्दा एक बार फिर बैठक के दौरान उठाया गया।
आधिकारिक जानकारी
संगठन के अध्यक्ष धर्म सिंह कृषाली ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी डोईवाला की ओर से कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया लंबित रखी गई है। सचिव सोहन सिंह नेगी ने बताया कि आगामी प्रांतीय अधिवेशन में डोईवाला संगठन से 10 प्रतिशत डेलीगेट के तहत 36 सदस्य देहरादून में मतदान में भाग लेंगे।
विधि सलाहकार राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने कहा कि गोल्डन कार्ड में कटौती के बावजूद जौलीग्रांट में भर्ती मरीजों को निशुल्क उपचार नहीं मिल पा रहा है और स्वास्थ्य प्राधिकरण को अस्पताल की पुरानी देनदारी का भुगतान करना चाहिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पेंशनरों का कहना है कि समय पर भुगतान न होने से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
संगठन के सदस्यों ने बताया कि बिलों के भुगतान और पेंशन प्रक्रिया में देरी से बुजुर्ग कर्मचारियों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
अन्य मुद्दे और सुझाव
सदस्य धीरेन्द्र सिंह कृषाली ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा बिलों के भुगतान के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। चतर सिंह पुंडीर ने राशिकरण की पूर्ति में 10 वर्ष 8 माह लगने का मुद्दा उठाया। बैठक में संगठन के नए सदस्यों शीला तोमर और राकेश चंद्र जोशी का स्वागत किया गया।
अधिकारियों का पक्ष
खंड शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट ने बताया कि कुछ सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन संबंधी कागजात जिले में वित्त अधिकारी के पास लंबित हैं। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद कागजात कार्यालय पहुंचेंगे और फिर पेंशन स्वीकृति के लिए कोषागार भेजे जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में उनकी ओर से कोई कमी नहीं है।
आगे क्या?
संगठन ने मांग की है कि पेंशन और चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। प्रशासनिक स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं के समाधान के बाद ही पेंशनरों की समस्याओं में राहत मिलने की उम्मीद है।






