
डोईवाला: डोईवाला क्षेत्र में हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही से जंगल से सटे गांवों में दहशत का माहौल है। गुरुवार तड़के करीब साढ़े चार बजे एक जंगली हाथी नांगल ज्वालापुर की संकरी गलियों में पहुंच गया, जिसे देखकर लोग घबरा गए। हालांकि हाथी बिना नुकसान पहुंचाए जंगल की ओर लौट गया, लेकिन घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय व्याप्त है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
डोईवाला क्षेत्र में पिछले कई महीनों से हाथियों की सक्रियता बढ़ी हुई है। जंगलों में भोजन और मार्ग अवरुद्ध होने के कारण हाथी अक्सर आबादी की ओर बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही लोगों की आवाजाही कम हो जाती है और सुबह की मॉर्निंग वॉक भी अब जोखिमभरी हो गई है। कई बार भीड़भाड़ वाली गलियों में हाथियों के प्रवेश से हालात अचानक तनावपूर्ण हो जाते हैं।
औपचारिक जानकारी
गुरुवार तड़के लगभग साढ़े चार बजे नांगल ज्वालापुर में एक हाथी अचानक दिखाई दिया, जो मोहल्ले की संकरी गलियों से गुजरते हुए गांव के अंदर तक पहुंच गया। लोगों ने जैसे ही हाथी को देखा, इलाके में अफरा-तफरी फैल गई। गनीमत रही कि हाथी शांत था और कुछ देर बाद स्वयं ही जंगल की ओर लौट गया।
ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने बताया कि नांगल ज्वालापुर–सत्तीवाला कॉरिडोर हाथियों का पारंपरिक मार्ग है। पहले क्षेत्र में विद्युत फेंसिंग नहीं थी, जिसके कारण हाथी सीधे अपने प्राकृतिक रास्ते से आगे बढ़ जाते थे। अब फेंसिंग लगने के कारण हाथियों को रास्ता बदलकर आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे मनुष्य–वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बढ़ गई है।
लच्छीवाला रेंजर मेधावी कीर्ति ने बताया कि सुबह के समय हाथियों की सक्रियता अधिक रहती है। इसीलिए जंगल से लगे मोहल्लों के लोगों को मॉर्निंग वॉक के लिए बाहर निकलने से फिलहाल परहेज करना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी तरह की गतिविधि तुरंत वन विभाग को सूचना देने की अपील की है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही से उनका रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। कई ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से शाम के बाद घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कुछ लोगों ने वन विभाग से तत्काल अतिरिक्त गश्त, निगरानी और सुरक्षित मार्ग बनाने की मांग की है।
आगे क्या?
वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है और उनके पुराने मार्ग को पुनर्स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। विभाग जल्द ही स्थानीय समुदाय के साथ बैठक कर सुरक्षा उपायों की जानकारी देगा। अधिकारियों ने कहा कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए तकनीकी एवं सामुदायिक स्तर पर कदम उठाए जाएंगे।







