
देवप्रयाग: देवप्रयाग के मुनेठ गाँव और आसपास के क्षेत्रों में बाघ की बढ़ती गतिविधियों से दहशत फैल गई है। रविवार शाम एक आठ वर्षीय बच्चे और सोमवार को एक महिला पर बाघ के हमले की कोशिश के बाद ग्रामीणों ने रेंजर मदन सिंह रावत का घेराव कर सुरक्षा के लिए तत्काल पिंजरा लगाने की मांग उठाई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देवप्रयाग के कई ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ समय से बाघ की आवाजाही बढ़ी है, जिससे लोगों में भय का माहौल है। पहले भी पहाड़ी क्षेत्रों में पालतू मवेशियों और छोटे बच्चों पर वन्यजीवों के हमले देखने को मिले हैं, लेकिन लगातार तीन घटनाओं के बाद मुनेठ गाँव के लोग अधिक चिंतित हैं।
अधिकारिक जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार शाम लगभग 6 बजे मुनेठ गाँव में आठ वर्षीय संदीप सिंह को उसकी माँ ने बाघ के हमले से बचाया। इसके अगले ही दिन सरोजनी देवी, पत्नी शिव सिंह मुनेठ, के पीछे भी बाघ दौड़ पड़ा, हालांकि वे सुरक्षित रहीं। वहीं गाँव के आंगन से बाघ एक बकरी को भी उठा ले गया। वन विभाग की ओर से इन घटनाओं पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। अधिकारी संपर्क में नहीं आए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं से बच्चों और महिलाओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
एक ग्रामीण ने बताया कि “अगर जल्द पिंजरा नहीं लगाया गया तो बड़ी अनहोनी हो सकती है।”
स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का भी आरोप लगाया।
जन आक्रोश और विरोध
इन घटनाओं से नाराज ग्रामीणों ने रेंजर मदन सिंह रावत का गौर्थीकांडा के बदर गाँव में करीब दो घंटे घेराव किया। राज्य आंदोलनकारी बिनोद टोडरिया के नेतृत्व में ग्रामीणों ने गाँव में बाघ पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की सख्त मांग रखी।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पिंजरा नहीं लगाया गया, तो पूरा गाँव परिवार सहित वन विभाग के गेस्ट हाउस में धरना देने पहुंचेगा।
आगे क्या
ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर स्थिति की समीक्षा की उम्मीद है। यदि बाघ की गतिविधियाँ जारी रही तो मौके पर टीम तैनात करने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की संभावना है।






