
देहरादून: उत्तराखंड में निवासरत परिवारों की पहचान को एकीकृत और सशक्त बनाने के लिए देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना को लागू किया जा रहा है। 12 नवंबर 2025 को हुई धामी मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद से नियोजन विभाग द्वारा इसके लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों वाला एक्ट तैयार किया जा रहा है। विभागीय स्तर पर यह एक्ट अब अंतिम चरण में है और आगामी 24 मार्च को मुख्यमंत्री के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस योजना को औपचारिक रूप से प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र परिवारों तक पहुंचाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2022 में हरियाणा की तर्ज पर राज्य में भी परिवार पहचान पत्र व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया था। उद्देश्य यह था कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं एक सुव्यवस्थित डेटा बेस के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचें और बार-बार एक ही परिवार को लाभ मिलने जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण हो सके। इस दिशा में वर्ष 2024 में नियोजन विभाग ने एक अलग प्रकोष्ठ का गठन किया और एनआईसी के माध्यम से इसके लिए पोर्टल भी तैयार किया गया।
आधिकारिक जानकारी
नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना को कानूनी पहचान देने के लिए एक विस्तृत एक्ट तैयार किया जा रहा है, जिसमें आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं। यह प्रस्ताव आगामी 11 फरवरी को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तुत कर पारित कराया जाएगा, ताकि 24 मार्च 2026 को योजना को लागू किया जा सके। योजना के शुभारंभ को पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने के कार्यक्रमों से जोड़ा गया है।
योजना के प्रमुख प्रावधान
देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना के तहत राज्य में निवासरत प्रत्येक परिवार का एक विस्तृत और अद्यतन डेटा बेस तैयार किया जाएगा। हर परिवार को एक यूनिक परिवार पहचान संख्या दी जाएगी, जिसके माध्यम से सभी सरकारी योजनाएं उस परिवार की आईडी से संबद्ध होंगी। योजना लागू होने के बाद पात्र परिवारों को यह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा कि वे किन योजनाओं के लिए योग्य हैं, किन योजनाओं का लाभ वे पहले ही ले चुके हैं और किन योजनाओं का लाभ आगे लिया जा सकता है। इससे योजनाओं की पारदर्शिता और पहुंच दोनों में सुधार होगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होंगे और योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया सरल होगी। कई परिवारों को उम्मीद है कि एक ही पहचान पत्र से विभिन्न योजनाओं की जानकारी और सेवाएं मिलना उनके लिए समय और संसाधनों की बचत करेगा।
आगे क्या होगा
योजना लागू होने के बाद प्रत्येक परिवार के एक मुखिया को आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से वे घर बैठे ही परिवार के सदस्यों के नाम, पते या अन्य विवरणों में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे। परिवारों में समय-समय पर सदस्यों की संख्या में होने वाले बदलाव को देखते हुए यह सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और डेटा हमेशा अद्यतन रहेगा।







