
देहरादून: बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनज़र दिल्ली में पुरानी डीजल बसों के प्रवेश पर गुरुवार से लगने वाले प्रतिबंध को लेकर बुधवार शाम सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने से उत्तराखंड परिवहन निगम को बड़ी राहत मिली है। इस आदेश से न केवल निगम की दिल्ली मार्ग पर चलने वाली बसों का संचालन प्रभावित होने से बच गया, बल्कि प्रतिदिन हजारों यात्रियों को होने वाली असुविधा भी टल गई। निगम के बेड़े में शामिल बीएस-4 श्रेणी की बसें प्रतिबंध के दायरे में आ रही थीं, जिसको लेकर दिनभर चिंता बनी हुई थी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दिल्ली सरकार बीते चार वर्षों से प्रदूषण नियंत्रण के तहत राजधानी में पुरानी डीजल बसों और वाहनों के प्रवेश पर रोक की तैयारी कर रही थी। वर्ष 2021 से विभिन्न राज्यों के परिवहन निगमों को पत्र भेजकर बीएस-3 और बीएस-4 डीजल बसों के प्रवेश पर प्रतिबंध की चेतावनी दी जाती रही है। हाल ही में प्रदूषण के स्तर में तेज वृद्धि के बाद दिल्ली सरकार ने गुरुवार से सख्त प्रतिबंध लागू करने का आदेश जारी किया था।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड परिवहन निगम के अनुसार दिल्ली मार्ग पर संचालित कुल 540 बसों में से 192 बीएस-4 श्रेणी की डीजल बसें हैं, जो प्रतिबंध की जद में आ रही थीं। संभावित कार्रवाई से बचने के लिए बुधवार को इन बसों की संख्या में कटौती कर संचालन किया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब पहले की तरह दिल्ली के लिए बसों का संचालन सुचारु रूप से किया जा रहा है।
यात्रियों पर असर
दिल्ली मार्ग पर उत्तराखंड से प्रतिदिन लगभग 40 से 50 हजार यात्री आवागमन करते हैं। प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में इन यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता। सुप्रीम कोर्ट की रोक से यात्रियों को भी बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 10 वर्ष तक पुराने बीएस-4 डीजल वाहनों और 15 वर्ष तक पुराने बीएस-4 पेट्रोल वाहनों को फिलहाल राहत दी है। इस आदेश के चलते उत्तराखंड परिवहन निगम की बीएस-4 बसें दिल्ली मार्ग पर चलती रहेंगी।
वोल्वो बसों को लेकर चिंता
परिवहन निगम के लिए सुपर डीलक्स वोल्वो बसें आय का अहम स्रोत हैं। निगम के पास कुल 53 वोल्वो बसें हैं, जिनमें से 23 देहरादून से दिल्ली मार्ग पर चलती हैं। इनमें केवल 12 बसें ही बीएस-6 श्रेणी की हैं, जबकि शेष बीएस-4 हैं। प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में दिल्ली के लिए केवल 12 वोल्वो बसें ही जा पातीं, जिससे उच्च वर्ग के यात्रियों और निगम दोनों को नुकसान होता।
प्रदूषण प्रमाण-पत्र अनिवार्य
निगम प्रबंधन ने दिल्ली जाने वाली सभी बसों के लिए प्रदूषण जांच प्रमाण-पत्र अनिवार्य कर दिया है। बिना वैध प्रमाण-पत्र के किसी भी बस को दिल्ली न भेजने के निर्देश सभी डिपो प्रबंधकों को दिए गए हैं।
आगे क्या होगा
परिवहन निगम का कहना है कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राहत मिली है, लेकिन भविष्य में संभावित सख्ती को देखते हुए बीएस-6 श्रेणी की बसों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाना आवश्यक है। निगम के पास 10 वर्ष से अधिक पुरानी कोई बस दिल्ली मार्ग पर संचालित नहीं की जा रही है।







