
देहरादून: उत्तराखंड में जंगली जानवरों का आतंक अब केवल पहाड़ी जिलों तक सीमित नहीं रह गया है। हाथी, गुलदार और भालू जैसे वन्यजीव अब मैदानी जिले देहरादून में भी आबादी के बीच दिखाई देने लगे हैं। हाल के महीनों में हाथियों द्वारा रिहायशी इलाकों में उत्पात, गुलदार की बार-बार मौजूदगी और भालू के हमलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह उठने लगे हैं कि जब राजधानी देहरादून में ही वन्यजीवों को आबादी में आने से नहीं रोका जा पा रहा, तो पहाड़ी इलाकों की स्थिति कितनी गंभीर होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में लंबे समय से मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। अब यही समस्या मैदानी क्षेत्रों में भी फैलने लगी है, जिससे जनसुरक्षा और वन प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहर में हाथियों का उत्पात
देहरादून के नवादा क्षेत्र में 13 और 14 जुलाई की रात करीब दो बजे हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। यह पहला मौका था जब इस रिहायशी इलाके में हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई। हाथियों ने खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया और घरों में घुसने की कोशिश के दौरान दीवारों व दरवाजों को तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
गुलदार की बढ़ती चहलकदमी
हाथियों के अलावा गुलदार भी देहरादून के आसपास के क्षेत्रों में लगातार दिखाई दे रहा है। इसी महीने 12 दिसंबर को विकासनगर क्षेत्र के उपरौली गांव में गुलदार एक जानवर को उठा ले गया। इसके अलावा गुलदार को एफआरआई परिसर, रायपुर, डोईवाला और अन्य कॉलोनियों के आसपास भी कई बार देखा जा चुका है। इससे पहले राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में भी गुलदार और टाइगर की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है।
देहरादून में भालू का हमला
18 दिसंबर को डोईवाला क्षेत्र में जंगल में घास लेने गई 45 वर्षीय महिला सुशीला पर दो भालुओं ने हमला कर दिया। इस घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिनका इलाज अभी जारी है। इस हमले ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया, क्योंकि इससे पहले भालू के हमले मुख्य रूप से चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिलों में सामने आते थे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी सुधीर जोशी का कहना है कि घटनाओं के बाद क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और लोगों से जंगल न जाने की अपील की जा रही है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि मवेशियों के चारे और सर्दियों में लकड़ी के लिए जंगल जाना कई बार मजबूरी बन जाता है।
आधिकारिक जानकारी
देहरादून के प्रभागीय वनाधिकारी अमित कंवर ने बताया कि देहरादून के आसपास के कई क्षेत्र जंगलों से सटे हुए हैं। डोईवाला की घटना के बाद वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों से अपील की जा रही है कि वे जंगल में अकेले न जाएं और सावधानी बरतें। हाथी और गुलदार की हालिया गतिविधियां मुख्य रूप से पछवादून के उन इलाकों में हैं, जो सीधे जंगल से जुड़े हुए हैं।
आगे क्या होगा
वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए दीर्घकालिक रणनीति, वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की बेहतर व्यवस्था जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके।







