
देहरादून: दूसरे राज्यों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेकर देहरादून में यात्री वाहन पंजीकृत कराने वाले वाहन स्वामियों के लिए अब पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मूल पते या पंजीकृत किरायानामे का स्थानीय पुलिस से सत्यापन हुए बिना देहरादून संभाग में पंजीकरण नहीं किया जाएगा। हाल के दिनों में सामने आए संदिग्ध मामलों के बाद यह निर्णय लिया गया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
परिवहन विभाग के अनुसार पिछले कुछ महीनों में जांच के दौरान पाया गया कि कई वाहन स्वामी अधूरे या विसंगतिपूर्ण दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा कर रहे थे। कुछ मामलों में पते और पहचान संबंधी दस्तावेजों में गंभीर अंतर पाए गए, जिससे गलत आधार पर पंजीयन प्रमाण पत्र जारी होने की आशंका बढ़ गई थी।
इसी को देखते हुए विभाग ने अब ‘सत्यापन पहले, सेवा बाद में’ नीति लागू कर दी है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
आरटीओ ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा कि 12 सीटर से अधिक क्षमता वाले यात्री वाहनों के पंजीकरण और परमिट से जुड़े सभी कार्य अब पूर्ण दस्तावेज सत्यापन के बाद ही किए जाएंगे। आदेश लागू होते ही आरटीओ कार्यालयों में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि बड़ी संख्या में आवेदन अधूरे कागजों के कारण लंबित हैं।
नए निर्देशों के अनुसार यदि किसी भी आवेदन में एक भी दस्तावेज कम पाया गया तो उसे तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। एजेंटों की भूमिका पर भी निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।
नई गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु
- स्थायी भवन स्वामित्व प्रमाण या पंजीकृत किरायानामा अनिवार्य।
- स्थानीय पुलिस से वाहन स्वामी या किरायेदार का सत्यापन आवश्यक।
- फर्म के मामले में जीएसटी प्रमाण-पत्र अनिवार्य।
- संभागीय अधिकारी या निरीक्षक की संयुक्त तकनीकी व भौतिक जांच रिपोर्ट।
- रिपोर्ट में वाहन के मूल रंग और भौतिक सत्यापन में दिखे रंग का उल्लेख।
- नए वाहनों में अधिकृत जीपीएस अनिवार्य।
- पिछले दो वर्षों में वाहन पर हुए चालानों की रिपोर्ट।
- वाहन स्वामी की पिछले तीन वर्षों की आयकर रिटर्न रिपोर्ट।
पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वाहन का ट्रांसफर या नया पंजीकरण किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून में संचालित कुछ ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि नियम सख्त होने से प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं अन्य वाहन मालिकों ने कहा कि यदि सभी दस्तावेज स्पष्ट हैं तो सत्यापन से कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
आरटीओ कार्यालयों में लंबित आवेदनों की अब नए नियमों के अनुसार जांच की जाएगी। विभाग का दावा है कि इससे फर्जी पंजीकरण पर रोक लगेगी और परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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