
देहरादून: राजधानी की यातायात व्यवस्था अब खतरे के मुहाने पर है। समय रहते समाधान न खोज पाने के कारण देहरादून अब एक बड़े ट्रैफिक संकट की ओर बढ़ रहा है। फरवरी 2026 में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होते ही शहर में वाहनों का दबाव 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा, जिससे जाम की स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
रिंग रोड योजना समय पर लागू न होने का असर
शहर की सड़कों और जंक्शनों पर पहले ही डिजाइन क्षमता से छह गुना अधिक वाहन चल रहे हैं। फिर भी अब तक देहरादून आउटर रिंग रोड की योजना केवल कागजों में ही सीमित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रिंग रोड का निर्माण एक्सप्रेसवे के साथ शुरू कर दिया जाता, तो दिल्ली, हरिद्वार, सहारनपुर और पांवटा से आने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ता। लेकिन वर्तमान में सारे वाहन शहर के भीतर से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे मुख्य चौराहों पर घंटों जाम लगता है।
शहर की सड़कों पर क्षमता से कई गुना दबाव
| जंक्शन / सड़क | डिज़ाइन पीसीयू | वर्तमान पीसीयू दबाव |
|---|---|---|
| घंटाघर | 3600 | 14282 |
| प्रिंस चौक | 2900 | 17090 |
| लालपुल | 2900 | 16664 |
| आराघर चौक | 2900 | 12272 |
| रिस्पना पुल | 2900 | 16453 |
| सर्वे चौक | 1200 | 6845 |
| बल्लीवाला चौक | 1200 | 9603 |
| सहारनपुर चौक | 2900 | 7208 |
स्रोत: यातायात विभाग, देहरादून
(डेटा: यातायात विभाग)
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देहरादून की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव डिज़ाइन सीमा से चार से छह गुना अधिक है,
जिससे हर रोज यातायात व्यवस्था चरमराती जा रही है।
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अभी भी धरातल से दूर प्रमुख परियोजनाएं
मोहकमपुर से आशारोड़ी एलिवेटेड रोड (12 किमी): 1500 करोड़ रुपये की यह परियोजना देहरादून आउटर रिंग रोड का पहला चरण मानी जा रही है। हालांकि, अभी केवल एलाइनमेंट पास हुआ है, टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। इससे हरिद्वार और सहारनपुर की ओर जाने वाले वाहनों को राहत नहीं मिल पा रही।
रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड (26 किमी): 5000 करोड़ की इस परियोजना पर भूमि अधिग्रहण भी अधूरा है। पूरा होने पर मसूरी की ओर जाने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा।
51 किमी आउटर रिंग रोड: साल 2010 से प्रस्तावित यह परियोजना आज भी प्रारंभिक चरण में है। एनएचएआई को जिम्मेदारी सौंप दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
सार्वजनिक परिवहन प्रणाली भी कमजोर
मास्टर प्लान 2041 के अनुसार, देहरादून में दो लाख से अधिक परिवारों की आबादी 13 लाख से अधिक है, जिनमें से 85% लोग निजी वाहनों पर निर्भर हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सीमित होने से जाम पर काबू पाना असंभव हो गया है।
दून की सड़कों की चौड़ाई—समस्या की जड़
देहरादून में कुल 462.95 किमी सड़क नेटवर्क है, जिसमें से:
- 199.49 किमी सड़कें 12 मीटर से कम चौड़ी हैं (43%)
- 214.51 किमी सड़कें 12–30 मीटर चौड़ी (46%)
- सिर्फ 2.73% सड़कें 50–80 मीटर चौड़ी हैं
सबसे ज्यादा 363 किमी सड़कें नगर निगम के अधीन हैं, जहां न तो पर्याप्त चौड़ाई है और न ही पार्किंग या फुटपाथ की सुविधा।
यदि यही स्थिति बनी रही तो एक्सप्रेसवे शुरू होते ही देहरादून में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। सरकार को जल्द से जल्द आउटर रिंग रोड, एलिवेटेड रोड और सार्वजनिक परिवहन सुधार पर फोकस करना होगा। वरना आने वाले समय में दून का सफर मिनटों का नहीं, घंटों का हो जाएगा।






