
देहरादून नगर निगम में कांग्रेस पार्षद और नगर आयुक्त के बीच चला आ रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले जहां इसी मामले को लेकर नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी दो दिनों तक हड़ताल पर रहे, वहीं अब कांग्रेस पार्षद ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। मंगलवार को कार्यालय परिसर में माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब पार्षद ने नगर आयुक्त पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए। यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली, विकास कार्यों और सफाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने की बात सामने आ रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नगर निगम देहरादून में बीते कुछ दिनों से आंतरिक विवाद सार्वजनिक रूप से सामने आ रहा है। पार्षदों और नगर आयुक्त के बीच टकराव का असर कर्मचारियों की हड़ताल तक पहुंच चुका है। ऐसे मामलों में पहले भी देखा गया है कि प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान का नुकसान सीधे आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। यही वजह है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर नगर निगम की पारदर्शिता और कार्यशैली से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
आधिकारिक जानकारी
कांग्रेस पार्षद रॉबिन त्यागी ने नगर आयुक्त नमामि बंसल पर आरोप लगाया कि उनकी सह पर नगर निगम के टेंडरों में भ्रष्टाचार हो रहा है। पार्षद का कहना है कि नगर आयुक्त सरकार को खुश करने के लिए कांग्रेस पार्षदों के साथ दुर्व्यवहार कर रही हैं।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पार्षदों पर नगर आयुक्त से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था और हड़ताल पर चले गए थे। सोमवार को नगर आयुक्त ने कर्मचारियों के तीनों संगठनों से वार्ता कर हड़ताल समाप्त करवाई। नगर आयुक्त की ओर से यह भी बताया गया कि पहली बोर्ड बैठक में जारी किए गए टेंडरों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम के अंदर चल रहा यह विवाद विकास कार्यों और सफाई व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
नगर निगम कार्यालय में मौजूद कुछ कर्मचारियों ने भी बताया कि लगातार तनाव के कारण कामकाज पर असर पड़ रहा है।
संख्यात्मक विवरण
पार्षद रॉबिन त्यागी का आरोप है कि कुछ वार्डों में 70 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य प्रस्तावित हैं, जबकि उनके वार्ड को अब तक कोई बजट नहीं मिला है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ पार्षदों को एक करोड़ रुपये तक का बजट दिया गया है, जबकि कुछ को केवल 20 लाख रुपये।
आगे क्या होगा
नगर आयुक्त की ओर से गठित जांच समिति टेंडरों की प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होने की संभावना है। वहीं कांग्रेस पार्षदों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है।





