
देहरादून: देहरादून की पंचम अपर सेशन न्यायाधीश राहुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने एक हत्या मामले में साक्ष्यों के अभाव और पुलिस जांच में गंभीर लापरवाही को आधार बनाते हुए आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि जिस चाकू से महिला की हत्या बताई गई, उससे फिंगरप्रिंट तक नहीं लिए गए और कई अहम जांच प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं, जिससे अभियोजन पक्ष कमजोर हो गया। कोर्ट ने डोईवाला थाना पुलिस की लापरवाही को गंभीर मानते हुए पूर्व विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्णय और आदेश की प्रति एसएसपी को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मामला वर्ष 2016 का है। शिकायतकर्ता रेखा ने 3 जून 2016 को डोईवाला कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बहन रेनू की हत्या उसके पति साहिल अंसारी ने की है। पुलिस ने 4 जून 2016 को आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज किया था।
आधिकारिक जानकारी
अभियोजन के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेनू की मौत का कारण धारदार हथियार से गले की नस कटना बताया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 16 गवाह पेश किए गए, लेकिन अदालत ने जांच में कई गंभीर खामियां पाईं।
मामले की कहानी
शिकायत के मुताबिक, साहिल अंसारी ने वर्ष 2006 में रेनू को मेरठ से भगाकर लच्छीवाला लाया था और शिव मंदिर में शादी की थी, जिसके बाद देहरादून कोर्ट में कोर्ट मैरिज हुई। शादी के बाद एक बेटी पैदा हुई। आरोप था कि साहिल रेनू को छोड़ना चाहता था और धमकियां देता था। 3 जून 2016 की रात साहिल ने परिजनों को बताया कि उसकी पत्नी और बेटी घर पर नहीं हैं। अगले दिन मिस्सरवाला रेलवे लाइन के पास रेनू का शव मिला।
पुलिस जांच में खामियां
अभियोजन अधिवक्ता किशोर रावत ने बताया कि विवेचक ने कोर्ट में स्वीकार किया कि हत्या स्थल बताए गए बाथरूम का नक्शा नजरी नहीं बनाया गया, न ही उसे सील किया गया। आसपास के लोगों के बयान ठीक से दर्ज नहीं किए गए।
मृतका और आरोपी की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) नहीं निकाली गई और आरोपी की लोकेशन ट्रेस नहीं की गई। यहां तक कि जिस चाकू से हत्या बताई गई, उससे फिंगरप्रिंट भी नहीं लिए गए।
अदालत की टिप्पणी
अदालत ने माना कि इन गंभीर कमियों के कारण अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। पुलिस द्वारा आवश्यक साक्ष्य एकत्र न करने से मामले की नींव कमजोर पड़ी, जिसके चलते आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया।
आगे क्या होगा
कोर्ट के आदेश के अनुसार, डोईवाला थाना पुलिस की जांच में हुई लापरवाही के लिए पूर्व विवेचक के खिलाफ कार्रवाई पर विचार करने हेतु आदेश की प्रति एसएसपी को भेजी गई है। मामले में आगे विभागीय स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है।





