
देहरादून में हरेला गांव धाद की पहल पर चल रहा माल्टा महीना अभियान माल्टा मकरैंण के साथ संपन्न हो गया। रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में अभियान से जुड़े लोगों ने तीन वर्षों की यात्रा, चुनौतियों और उपलब्धियों को साझा किया। आयोजकों के अनुसार, पहाड़ के माल्टे को बाजार और समाज से जोड़ने का यह प्रयास इस वर्ष निर्णायक मुकाम तक पहुंचा है। कार्यक्रम में माल्टा को बढ़ावा देने में योगदान देने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरेला गांव धाद द्वारा शुरू किया गया माल्टा महीना अभियान पहाड़ी उत्पादों को पहचान दिलाने की दिशा में एक सतत प्रयास रहा है। पहाड़ों में उत्पादित माल्टे को लंबे समय तक उचित बाजार नहीं मिल पाता था। इस अभियान का उद्देश्य स्थानीय किसानों के उत्पाद को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना और पहाड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूती देना रहा है।
आधिकारिक जानकारी
कार्यक्रम में हरेला गांव के संयोजक देवेंद्र नेगी ने बताया कि तीन वर्षों से चल रहे इस अभियान को इस वर्ष निर्णायक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग मिलने से पहाड़ी माल्टे को पहचान और बाजार दोनों मिले हैं। इस अवसर पर माल्टा को समाज तक पहुंचाने में भूमिका निभाने वाले डॉ. आरपी खुकसाल, बीरबान सिंह रावत, डॉ. आशा रानी कपूर, गीता क्षेत्री, सुधांशु चौधरी, प्रदीप डिमरी, देवेंद्र कांडपाल और उर्मिला थापा को सम्मानित किया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि ऐसे अभियानों से पहाड़ के उत्पादों को नई पहचान मिलती है और युवाओं को स्थानीय संसाधनों से रोजगार के अवसर दिखते हैं। उपस्थित नागरिकों ने इसे पहाड़ी संस्कृति और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाला प्रयास बताया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति
इस मौके पर “माल्टा चला दिल्ली” नाटक का मंचन भी किया गया, जिसमें एक बेरोजगार युवक की कहानी के माध्यम से पहाड़ से पलायन और स्थानीय संसाधनों के महत्व को दर्शाया गया। नाटक को दर्शकों की सराहना मिली।
आगे क्या होगा
आयोजकों के अनुसार, आने वाले समय में माल्टा महीना अभियान को और विस्तार दिया जाएगा। बाजार से जुड़े नए चैनलों और शहरों में पहुंच बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, ताकि पहाड़ी किसानों को स्थायी लाभ मिल सके।







