
देहरादून: जिलाधिकारी कार्यालय में लगने वाले जनता दरबारों में हर हफ्ते सैकड़ों लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं। आदेश तो तुरंत जारी होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई न होने से फरियादी महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सोमवार को देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय में लगे जनता दरबार में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां करीब 150 से अधिक लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जनता दरबारों का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान करना है, लेकिन हकीकत में कई शिकायतें केवल फाइलों में सिमट कर रह जाती हैं। देहरादून जिले में हर सप्ताह जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में जनता दरबार आयोजित किया जाता है। बावजूद इसके, फरियादियों का कहना है कि कार्रवाई का असर जमीन पर दिखता नहीं।
क्या हुआ जनता दरबार में
सोमवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ने कचहरी स्थित कार्यालय में जनता दरबार लगाया, जिसमें करीब 180 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें ज़्यादातर मामले भूमि विवाद, पारिवारिक झगड़े, और धोखाधड़ी से जुड़े थे। जिलाधिकारी ने कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और संबंधित विभागों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए। लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आदेश तो हो जाते हैं, पर कार्रवाई नहीं होती।
फरियादियों की आवाज़
देहरादून निवासी सुनीता धारिया ने बताया कि एक व्यक्ति ने प्रोजेक्ट के नाम पर उनसे लाखों रुपये की ठगी की थी। उन्होंने कहा, “मैं दो महीने से डीएम ऑफिस के चक्कर लगा रही हूं। तीसरी बार जनता दरबार आई हूं, पर कार्रवाई नहीं हो रही।”
उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत पर 27 अक्टूबर को FIR दर्ज हुई थी, लेकिन अभी तक पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
वहीं, जनता दरबार में एक बुजुर्ग महिला भी अपनी पीड़ा लेकर पहुंचीं। वह राज्य आंदोलनकारी चिन्हिकरण की मांग को लेकर पिछले कई महीनों से दरबार में आ रही हैं। उन्होंने नम आंखों से कहा, “मेरे पति राज्य आंदोलन में शामिल थे, 1994 में उनका निधन हो गया। मैं उम्र के इस पड़ाव में भी अपने अधिकार के लिए दर-दर भटक रही हूं।”
प्रशासन का दावा और हकीकत
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि जनता दरबार में आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इसके लिए ऑनलाइन और मैनुअल फॉलोअप प्रणाली लागू की गई है। लेकिन कई मामलों में विभागों की उदासीनता और जवाबदेही की कमी के चलते शिकायतें लंबित रह जाती हैं।
जवाबदेही की जरूरत
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनता दरबार का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और हर आदेश के बाद उसकी स्थिति सार्वजनिक की जाए। तभी जनता का भरोसा इस व्यवस्था पर कायम रह सकेगा।






