
देहरादून: सरकारी खाद्य योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे अपात्र उपभोक्ताओं पर जिला पूर्ति विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रारंभिक जांच में 27 हजार से अधिक ऐसे राशनकार्ड धारक सामने आए हैं, जिनके पास उच्च आय, आलीशान मकान और महंगी गाड़ियाँ होने के बावजूद वे सस्ते सरकारी राशन का लाभ ले रहे थे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA), अंत्योदय अन्न योजना और राज्य खाद्य योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाई गई हैं। लेकिन लंबे समय से इन योजनाओं में अपात्र लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की शिकायतें मिल रही थीं। विभागीय जांच में इस अनियमितता की पुष्टि हुई है।
अधिकारिक जानकारी
जांच में यह पाया गया कि कई लाभार्थी इनकम टैक्स दायरे में आते हैं, लक्ज़री वाहन रखते हैं और उच्च आय के बावजूद सरकारी खाद्यान्न प्राप्त कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि पात्रता मानकों से ऊपर आय अर्जित करने वालों की पात्रता समाप्त की जाएगी।
डीएसओ केके अग्रवाल ने बताया कि, “अपात्र लाभार्थियों की पहचान हो चुकी है। विभाग ने उनसे स्वेच्छा से राशन कार्ड जमा करने की अपील की है। निर्धारित समय में कार्ड न लौटाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
कुछ अधिकारी इस मामले में विस्तृत टिप्पणी से बचते दिखे, लेकिन कहा कि विभाग का उद्देश्य वास्तविक पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाना है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग की यह कार्रवाई लंबे समय से आवश्यक थी। कई लोगों ने कहा कि सस्ती दरों पर मिलने वाला राशन उन्हीं को मिलना चाहिए जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि अपात्र परिवारों द्वारा आरटीई शिक्षा और आयुष्मान योजना जैसे लाभ लेना वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
पात्रता सीमाएँ (डेटा / संख्या)
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA): वार्षिक आय सीमा — 1.80 लाख रुपये
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY): मासिक आय सीमा — 15,000 रुपये
- राज्य खाद्य योजना: वार्षिक आय सीमा — 4.80 लाख रुपये
- पहचाने गए अपात्र लाभार्थी: 27,000+
अब आगे क्या?
विभाग ने सभी अपात्र कार्ड धारकों को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। स्वेच्छा से कार्ड जमा न करने वालों पर रिकवरी और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। जिला पूर्ति विभाग का कहना है कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन और आय रिकॉर्ड की नियमित जांच को और सख्त किया जाएगा।







