
देहरादून: शहर की शान और ऐतिहासिक पहचान — घंटाघर की घड़ी अब एक बार फिर सही समय बता रही है। लंबे समय से बंद पड़ी और गलत समय दिखाने वाली इस घड़ी को जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर दुरुस्त किया गया। विशेषज्ञ फर्म की मदद से तकनीकी मरम्मत के बाद घंटाघर की घड़ी अब फिर से “देहरादून की धड़कन” बन गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून का घंटाघर न केवल शहर का भौगोलिक केंद्र है, बल्कि यह शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी है। वर्षों से यहां की घड़ी शहर के समय की सटीकता का प्रतीक रही है। पिछले कुछ समय से घड़ी की सुई रुक जाने और गलत समय दिखाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिससे स्थानीय नागरिकों में निराशा थी।
प्रशासन की तत्परता
जिलाधिकारी सविन बंसल ने शिकायतों का संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने घड़ी की मरम्मत के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत की और इसके तकनीकी सुधार का कार्य चेन्नई की प्रसिद्ध फर्म ‘इंडियन क्लॉक्स’ को सौंपा गया।
तकनीकी मरम्मत का कार्य
फर्म के इंजीनियरों ने जांच के दौरान पाया कि घड़ी की वायरिंग, जीपीएस यूनिट, लाउडस्पीकर और बेल सिस्टम में खराबी आ चुकी थी। सभी हिस्सों को बदला गया और संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और मेकेनिकल सेटअप को दोबारा रीसेट किया गया।
अब घड़ी न केवल सटीक समय बता रही है, बल्कि उसकी पारंपरिक घंटी की ध्वनि भी फिर से सुनाई देने लगी है।
सौंदर्यीकरण और रखरखाव
घंटाघर का सौंदर्यीकरण कार्य पहले ही जिला प्रशासन की देखरेख में पूरा किया जा चुका था। इस कार्य को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जनता को समर्पित किया गया था। अब घड़ी के पुनः चालू होने से शहरवासियों के बीच खुशी का माहौल है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी प्रेमलाल जोशी ने कहा, “घंटाघर की घड़ी चलना सिर्फ समय बताना नहीं, बल्कि देहरादून की आत्मा की वापसी है।”
वहीं, पास के दुकानदार मनोज थपलियाल ने कहा, “हर घंटे बजने वाली घंटी की आवाज से शहर में पुराने देहरादून की याद लौट आई है।”
आगे की योजना
प्रशासन अब घंटाघर परिसर की नाइट लाइटिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग की योजना पर भी विचार कर रहा है, ताकि यह ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहे। साथ ही रखरखाव के लिए एक स्थायी टीम गठित करने की तैयारी भी चल रही है।







