
देहरादून: उत्तराखंड के विधानसभा सचिवालय में नौकरी के नाम पर फर्जी नियुक्तिपत्र जारी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह नियुक्तिपत्र एक महिला के लिए जारी किया गया था, और आशंका है कि इसके पीछे एक संगठित ठगी गिरोह सक्रिय है। नेहरू कॉलोनी पुलिस ने अनु सचिव की शिकायत पर बृहस्पतिवार को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस जल्द ही नियुक्तिपत्र प्राप्त करने वाली महिला से पूछताछ करेगी।
मामले का विवरण
थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने बताया कि विधानसभा सचिवालय के अनु सचिव हरीश कुमार ने शिकायत दर्ज की है। उनकी तहरीर के अनुसार, 6 अगस्त 2025 को सौडा सरोली निवासी निधि उनियाल को लिपिक के स्थायी पद पर एक जाली नियुक्तिपत्र जारी किया गया। यह पत्र अमित सिंह नामक कथित उप सचिव के हस्ताक्षर से जारी था, लेकिन जांच में पाया गया कि इस नाम का कोई व्यक्ति विधानसभा में उप सचिव के पद पर कार्यरत नहीं है।
2024 की एक पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में जाली नियुक्तिपत्र और सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी के 10% मामले संगठित गिरोहों से जुड़े हैं।
पुलिस की कार्रवाई
नेहरू कॉलोनी पुलिस ने जालसाजी और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने कहा, “हम मामले की गहन जांच कर रहे हैं। जल्द ही निधि उनियाल से पूछताछ की जाएगी ताकि जाली पत्र के स्रोत का पता लगाया जा सके।” पुलिस को शक है कि यह एक संगठित गिरोह का काम हो सकता है, जो सरकारी नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा है।
स्थानीय निवासी रमेश शर्मा ने कहा, “ऐसे मामले लोगों का भरोसा तोड़ते हैं। सरकारी नौकरी का लालच देकर ठगी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
ठगी का पैटर्न
उत्तराखंड में हाल के वर्षों में जाली नियुक्तिपत्र के मामले बढ़े हैं। 2024 में देहरादून में 15 से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें ज्यादातर युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये ठगे गए। संगठित गिरोह फर्जी दस्तावेज और कथित अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में लेते हैं।
अनु सचिव हरीश कुमार ने बताया, “ऐसे मामले सचिवालय की साख को नुकसान पहुंचाते हैं। हमने तुरंत पुलिस को सूचित किया ताकि दोषियों को पकड़ा जाए।”







