
देहरादून: देहरादून के जिलाधिकारी (डीएम) सविन बंसल ने आज आर्केडियाग्रांट गांव में पहुंचकर फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiment) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों के साथ मिलकर धान की फसल भी काटी। कटाई प्रयोग में 43.30 वर्ग मीटर के प्लॉट से 17 किलो 500 ग्राम धान की उपज प्राप्त हुई। यह डाटा जीसीईएस और सीसीई एग्री ऐप के जरिए भारत सरकार के पोर्टल पर खेत से ही अपलोड किया गया। यह कदम किसानों की उपज का सटीक आकलन और सरकारी योजनाओं को लागू करने में मदद करेगा।
फसल कटाई प्रयोग का विवरण
डीएम सविन बंसल ने आर्केडियाग्रांट में फसल कटाई प्रयोग के दौरान खेतों का दौरा किया और किसानों के साथ धान काटने में हिस्सा लिया। राजस्व उप निरीक्षक ने इस प्रयोग को जीसीईएस (जनरल क्रॉप एस्टीमेशन सर्वे) और सीसीई एग्री ऐप का उपयोग करके संपादित किया। प्रयोग के तहत 43.30 वर्ग मीटर के एक निश्चित प्लॉट में कटाई की गई, जिसमें 17.5 किलोग्राम धान की उपज मिली।
इस डाटा को तुरंत भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किया गया, जो फसल बीमा, उत्पादन अनुमान, और सरकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। 2024 की एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून जिले में धान की औसत उपज 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही है, और इस तरह के प्रयोग उपज के सटीक आकलन में मदद करते हैं।
डीएम का किसानों के साथ जुड़ाव
सविन बंसल ने किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने कहा, “फसल कटाई प्रयोग से हमें सही उत्पादन का आंकलन करने में मदद मिलती है, जिससे किसानों को फसल बीमा और अन्य योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।” डीएम ने किसानों को आधुनिक तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
स्थानीय किसान रमेश सिंह ने कहा, “डीएम साहब का खेत में आकर फसल काटना और हमारी बात सुनना बहुत अच्छा लगा। इससे हमें लगता है कि सरकार हमारे साथ है।”
तकनीक का उपयोग
इस प्रयोग में सीसीई एग्री ऐप का उपयोग एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ऐप प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल कटाई प्रयोग के डाटा को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करने में मदद करता है। जीसीईएस के जरिए उपज का सटीक मापन किया जाता है, जो किसानों को नुकसान की स्थिति में बीमा क्लेम में सहायता देता है। 2024 में उत्तराखंड में 80% फसल कटाई प्रयोग डिजिटल रूप से दर्ज किए गए, जिसने पारदर्शिता बढ़ाई है।
आर्केडियाग्रांट में कृषि का महत्व
आर्केडियाग्रांट देहरादून का एक प्रमुख कृषि क्षेत्र है, जहां धान, गेहूं, और सब्जियां मुख्य फसलें हैं। 2024 की कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून जिले में 25,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर धान की खेती होती है। इस तरह के फसल कटाई प्रयोग न केवल उपज का आकलन करते हैं, बल्कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में भी मदद करते हैं।







