
रामनगर। सर्दियों के शुरू होते ही उत्तराखंड के जंगलों में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। विशेषकर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के इलाकों में बाघ, तेंदुए और अन्य जंगली जानवर ठंड के मौसम में अधिक आक्रामक व्यवहार दिखाते हैं। ऐसे हालात को देखते हुए कॉर्बेट प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे लकड़ी, चारा या अन्य जरूरतों के लिए अकेले जंगल में न जाएं और सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हर वर्ष सर्दियों के मौसम में कॉर्बेट और उसके आसपास के जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इस दौरान बाघ और तेंदुए अक्सर अपने क्षेत्र की सुरक्षा और भोजन की तलाश में मानव बस्तियों के नजदीक तक आ जाते हैं। साथ ही, जंगलों में इस समय कई प्रजातियों का मेटिंग पीरियड भी होता है, जिससे जानवरों का व्यवहार अचानक बदलने लगता है। ऐसे में किसी भी अप्रत्याशित घटना की आशंका बढ़ जाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बेहद जरूरी हो जाती है।
आधिकारिक जानकारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय जंगलों में अनावश्यक गतिविधियों को कम रखा जाए। अधिकारियों ने गांवों में जाकर लोगों को समझाया कि जीवन किसी भी जोखिम से बड़ा है और सर्दियों के इस संवेदनशील समय में जंगलों की ओर बिना जरूरत न जाएं। प्रशासन ने लगातार जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को वन्यजीव व्यवहार और सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी है।
वन विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें हाई-अलर्ट पर हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि वे सुरक्षा निर्देशों को समझते हैं, लेकिन कई परिवारों के पास खाना पकाने और ठंड से बचने के लिए लकड़ी जुटाने का कोई और साधन नहीं है। मजबूरी के कारण लोग जोखिम उठाकर जंगलों की ओर जा रहे हैं। कई गांवों में महिलाओं और बुजुर्गों के अकेले जंगल जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों की यह बात सामने आई है कि अगर वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हो जाए, तो वे जंगल में जाने को तैयार नहीं हैं।
विशेषज्ञ टिप्पणी
कॉर्बेट क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि यह समय वन्यजीवों के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। ठंड के मौसम में उनका व्यवहार अनियमित हो सकता है, जिसके कारण वे अचानक मनुष्यों के संपर्क में आ जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेटिंग पीरियड और भोजन की कमी के दौरान यह संघर्ष स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में सतर्कता अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
आंकड़े / तथ्य
कॉर्बेट से सटे क्षेत्रों में हर वर्ष सर्दियों में जंगली जानवरों के मानव बस्तियों की ओर आने की कई घटनाएं दर्ज होती हैं। रिहायशी इलाकों के आसपास तेंदुए और बाघों के दिखाई देने की घटनाओं में इस समय स्पष्ट बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्रशासन द्वारा विभिन्न गांवों में जागरूकता बैठकों और गश्त की आवृत्ति बढ़ाई गई है।
आगे क्या?
कॉर्बेट प्रशासन ने ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक इंतजाम पर भी विचार शुरू कर दिया है, ताकि लोग जंगल जाने को मजबूर न हों। फिलहाल सुरक्षा टीमें चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं और जंगल के किनारे बसे इलाकों में अतिरिक्त गश्त बढ़ाई गई है। प्रशासन ने एक बार फिर अपील की है कि कोई भी व्यक्ति अकेले जंगल में न जाए और खतरा बढ़ने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दे।






