
रामनगर: कार्बेट टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को पहली बार पूरे दिन वन्यजीव देखने का अवसर मिल सकता है। रिजर्व प्रबंधन ने फुल डे सफारी की नई व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार कर वन मुख्यालय को भेजा है। अभी सफारी दो शिफ्टों में सीमित है, लेकिन प्रस्ताव लागू होने पर पर्यटक सुबह प्रवेश कर शाम को ही वापस लौटेंगे और पूरे दिन जंगल में रहकर वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कार्बेट टाइगर रिजर्व देश का सबसे लोकप्रिय टाइगर सफारी गंतव्य माना जाता है। यहां हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं, जिसके चलते पर्यटन सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए प्रबंधन अब सफारी समय को बढ़ाकर पूरे दिन की सफारी शुरू करने पर विचार कर रहा है। इससे पर्यटकों को अधिक समय मिलने के साथ वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अनुभव भी बेहतर होगा।
आधिकारिक जानकारी
रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला ने बताया कि फुल डे सफारी की व्यवस्था रणथंभौर और ताड़ोबा टाइगर रिजर्व में पहले से लागू है। कार्बेट में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। योजना के अनुसार गर्जिया, बिजरानी, ढेला और झिरना जोन में फुल डे सफारी शुरू की जा सकती है। इस व्यवस्था में सुबह प्रवेश करने वाले पर्यटक पूरे दिन जंगल में रहेंगे और दोपहर के समय जब सामान्य सफारी बंद रहती है, तब वे वन विभाग के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में विश्राम कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो पर्यटकों को सामान्य सफारी की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। फुल डे सफारी उन पर्यटकों के लिए उपयोगी होगी जो वन्यजीवों को देखने में अतिरिक्त समय चाहते हैं और सफारी का विस्तृत अनुभव लेना चाहते हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि फुल डे सफारी शुरू होने से कार्बेट में पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि पूरे दिन की सफारी से पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा, जिससे होटलों, गाइडों, स्थानीय परिवहन और अन्य सेवाओं को लाभ मिलेगा। कुछ गाइडों ने बताया कि पूरे दिन की सफारी से वन्यजीवों को देखने की संभावना भी अधिक रहती है, इसलिए यह पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हो सकती है।
टॉवर व्यू व्यवस्था
ढिकाला जोन में निगरानी के लिए बनाए गए टावरों पर भी अब पर्यटकों को बैठकर वन्यजीव देखने की अनुमति देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए एसओपी तैयार कर लिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार टावरों के आसपास सोलर फेंसिंग होगी और पर्यटकों के साथ प्रशिक्षित नेचर गाइड का होना अनिवार्य होगा। टावर में बैठने की अनुमति पहली शिफ्ट समाप्त होने और दूसरी शिफ्ट शुरू होने के बीच दी जाएगी, जिसके लिए पर्यटकों को अलग से शुल्क देना होगा। टावर में खाद्य सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी, लेकिन पानी ले जाया जा सकेगा।
इसके साथ ही हाथी सफारी को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है, जिसे पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर संचालित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए मौजूदा सुविधाओं के साथ नई गतिविधियों को शामिल करना जरूरी हो गया है।
पर्यटन आंकड़े और आर्थिक प्रभाव
कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में पिछले तीन वर्षों में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022–23 में 6,58,613 दर्शक पहुंचे, जबकि 2023–24 में यह संख्या बढ़कर 7,17,939 हो गई। वित्तीय वर्ष 2024–25 में 8,08,324 से अधिक लोग यहां सफारी करने पहुंचे हैं। वन विभाग का कहना है कि केवल कार्बेट टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों में ही वर्ष 2024–25 में लगभग एक हजार करोड़ रुपये का पर्यटन कारोबार हुआ है।
आगे क्या?
फुल डे सफारी पर अंतिम निर्णय वन मुख्यालय द्वारा मंजूरी मिलने के बाद ही होगा। मंजूरी के बाद कार्बेट उन चुनिंदा टाइगर रिजर्व्स की सूची में शामिल हो जाएगा जहां पर्यटक सुबह से शाम तक जंगल का अनुभव ले सकते हैं। विभाग उम्मीद कर रहा है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।






