
देहरादून: अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ शुरू हुआ ‘ऑपरेशन स्वास्थ्य’ आंदोलन अब जनसैलाब में बदल चुका है। स्थानीय लोगों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने कंधे से कंधा मिलाकर चौखुटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतरकर सरकार को झकझोर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का संज्ञान लेते हुए सीएचसी को उप जिला अस्पताल में अपग्रेड करने और 50 बेड व डिजिटल एक्स-रे मशीन की सुविधा देने का शासनादेश जारी किया। हालांकि, प्रदर्शनकारी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। यह आंदोलन न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर करता है, बल्कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाता है।
आंदोलन की शुरुआत: ‘सांसों की लड़ाई’
2 अक्टूबर 2025 को चौखुटिया में 15-20 लोगों ने बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ आंदोलन शुरू किया, जो अब हजारों की संख्या में जनसैलाब बन चुका है। पूर्व सैनिक भुवन कठायत और बचे सिंह की अगुवाई में शुरू हुए इस आंदोलन में पहले जल सत्याग्रह और फिर आमरण अनशन किया गया। अब रोजाना लोग तख्तियां लेकर स्वास्थ्य विभाग को जगाने की मांग कर रहे हैं।
बचे सिंह ने बताया, “चौखुटिया सीएचसी में न सर्जन है, न गायनाकोलॉजिस्ट, न बाल रोग विशेषज्ञ। 24 घंटे की इमरजेंसी सेवा सिर्फ कागजों पर है। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, और बुनियादी लैब टेस्ट सुविधाएं भी बंद हैं। बीते कुछ महीनों में कई मरीजों की मौत समय पर इलाज न मिलने से हुई है।” स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांसों की लड़ाई बन गया है।
भुवन कठायत ने कहा, “हमने बार-बार प्रशासन से अपील की, पत्र लिखे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ने लगे, तो हमें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा। जब तक ठोस सुधार नहीं होंगे, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
सरकार की प्रतिक्रिया: सीएचसी का अपग्रेडेशन
आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने त्वरित कार्रवाई की। 16 अक्टूबर 2025 को स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने शासनादेश जारी कर चौखुटिया सीएचसी को उप जिला अस्पताल में अपग्रेड करने की घोषणा की। इसके तहत:
- अस्पताल की बेड क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 की जाएगी।
- डिजिटल एक्स-रे मशीन स्थापित की जाएगी।
- डॉक्टरों की तैनाती के लिए विभाग कार्य शुरू करेगा।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कदम पर्याप्त नहीं है। बचे सिंह ने कहा, “कागजों पर 50 बेड दिखाए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति जर्जर है। जब तक विशेषज्ञ डॉक्टर और बुनियादी सुविधाएं नहीं आतीं, आंदोलन जारी रहेगा।”
चौखुटिया सीएचसी की स्थिति
2024 की स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, चौखुटिया सीएचसी में डॉक्टरों के 70% पद खाली हैं। सर्जन, गायनाकोलॉजिस्ट, और बाल रोग विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कोई नियुक्ति नहीं है। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं या तो बंद हैं या सीमित क्षमता में चल रही हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए अल्मोड़ा या हल्द्वानी जैसे दूर के शहरों में जाना पड़ता है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में मुश्किल और महंगा है। 2024 में 12 मरीजों की मौत का कारण समय पर इलाज न मिलना बताया गया।
राजनीतिक हलचल: कांग्रेस का समर्थन
2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही चौखुटिया का आंदोलन राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा, “चौखुटिया सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि गढ़वाल के कई क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का केंद्र है। सरकार ने न तो आंदोलनकारियों से बात की, न ही ठोस कदम उठाए।” उन्होंने सरकार पर स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
स्थानीय लोग इसे जनता की आवाज मानते हैं, जबकि सरकार का दावा है कि वह सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा, “हम चौखुटिया में सुविधाएं बढ़ा रहे हैं। जल्द ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति होगी।”







