
देहरादून: इस वर्ष चारधाम यात्रा के सफल संचालन और यात्रियों की संख्या में 3.05 लाख की वृद्धि के बाद अब पुलिस प्रशासन ने 2026 की यात्रा को और प्रभावी बनाने की दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। यातायात, सुरक्षा, पंजीकरण और चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े अनुभवों को आधार बनाकर विभाग ने सुझाव मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पर्यटन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। इस वर्ष बढ़ी हुई श्रद्धालु संख्या से राज्य को आर्थिक रूप से लाभ मिला, लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण व्यवस्थाओं की बड़ी परीक्षा भी हुई। डीजी कांफ्रेंस में भी उत्तराखंड पुलिस की यात्रा व्यवस्था की सराहना हुई, हालांकि कुछ क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र राजीव स्वरूप ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि वर्ष 2024 के अनुभवों के आधार पर इस बार रेंज स्तर पर चारधाम यात्रा पुलिस कंट्रोल रूम का गठन किया गया था। इसके माध्यम से यातायात, भीड़ प्रबंधन और विभागीय समन्वय को और मजबूत किया गया। उनके अनुसार, 2026 की यात्रा के लिए भी इसी मॉडल को और उन्नत तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
यात्रा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए उन्हें रेंज स्तर का चारधाम नोडल अधिकारी नामित किया गया, जबकि पुलिस अधीक्षक यातायात लोकजीत सिंह सहायक नोडल अधिकारी व प्रभारी कंट्रोल रूम बनाए गए। कंट्रोल रूम से दो हेल्पलाइन नंबर जारी कर लगातार यात्रियों से संपर्क बनाए रखा गया।
यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और निगरानी के लिए 1600 सीसीटीवी कैमरे, 13 ड्रोन और एएनपीआर कैमरों का उपयोग किया गया। इसके साथ ही हर्बटपुर में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन केंद्र स्थापित किया गया और कई नए पार्किंग व होल्डिंग क्षेत्रों को चिह्नित किया गया।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
यात्रा मार्ग पर तैनात पुलिस और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस वर्ष यातायात प्रबंधन पहले से बेहतर रहा, लेकिन भीड़ बढ़ने के समय कुछ स्थानों पर bottleneck स्थितियां बनीं। यात्रियों ने भी हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम से मिल रही सुविधा को यात्रा के दौरान काफी मददगार बताया।
यातायात एवं भीड़ नियंत्रण योजना
प्रभारी लोकजीत सिंह के नेतृत्व में यात्रा मार्ग के लिए विशेष तीन स्तरीय योजना—प्लान ए, प्लान बी और प्लान सी तैयार की गई। पूरे मार्ग को 42 जोन, 137 सेक्टर और 15 सुपर जोन में विभाजित किया गया। भारी भीड़ के समय टोकन व्यवस्था लागू कर यात्रियों के प्रवाह को नियंत्रित किया गया, जिससे यात्रा सुचारू रूप से संचालित हो सकी।
यात्रा का तुलनात्मक विवरण
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 की तुलना में इस वर्ष मृत्यु के मामलों में कमी आई। 2024 में 238 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई थी, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 227 रही। हेली दुर्घटनाओं में 13 की मृत्यु और 2 लोग घायल हुए।
शीतकालीन यात्राओं में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे—मुखवा में 1189, खरसाली में 390, ऊखीमठ में 2498 और ज्योतिर्मठ में 4311 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
आगे क्या?
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2026 की यात्रा के लिए सुधारों की विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। पंजीकरण प्रणाली, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, चिकित्सा सुविधाएँ और ड्रोन निगरानी को और सुदृढ़ करने की योजना है। पुलिस ने कहा कि हर विभाग के सुझाव लेकर एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे अगली यात्रा और भी सुरक्षित और सुचारू बन सके।






