
चंपावत: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत दौरे के दौरान बनबसा स्थित एनएचपीसी सभागार में आयोजित बजट-पूर्व संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने व्यापारी वर्ग, पर्यटन कारोबारियों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए हितधारकों से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट किसी भी राज्य की दशा और दिशा तय करता है, इसलिए इसे जनभागीदारी और संवाद के माध्यम से तैयार किया जाना जरूरी है। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों से मिले सुझावों को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर भी जोर दिया गया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
आगामी राज्य बजट से पहले सरकार प्रदेश के विभिन्न जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है, ताकि जमीनी जरूरतों और प्राथमिकताओं को समझा जा सके। इसी क्रम में बनबसा एनएचपीसी सभागार में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बजट-पूर्व संवाद आयोजित हुआ, जहां जनभागीदारी, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और संतुलित विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में राज्य के वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बीते पांच वर्षों में राज्य का कैपिटल आउटलेट 7,534 करोड़ रुपये से बढ़कर 14,765 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 में राज्य की जीडीपी 2 लाख 54 हजार करोड़ रुपये तक पहुंची, जो लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। मुख्यमंत्री धामी ने भरोसा दिलाया कि संवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट में यथासंभव शामिल किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और हितधारकों ने कहा कि बजट से पहले इस तरह का संवाद स्थानीय जरूरतों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। उनका मानना है कि इससे ग्रामीण, शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने में मदद मिलेगी।
आंकड़े और तथ्य
पांच वर्षों में कैपिटल आउटलेट में लगभग दोगुनी वृद्धि और राज्य की जीडीपी में करीब 60 प्रतिशत का इजाफा उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति को मजबूत दर्शाता है, जिसे अधिकारियों ने राज्य के बेहतर वित्तीय प्रबंधन का परिणाम बताया।
आगे क्या होगा
सरकार के अनुसार बजट-पूर्व संवाद में मिले सुझावों को विभागवार संकलित कर समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक गांव में पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाओं पर काम किया जाएगा और वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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