
देहरादून: मध्य क्षेत्रीय परिषद की 17वीं स्थायी समिति की बैठक में उत्तराखंड सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे जाएंगे। यह उच्चस्तरीय बैठक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित हो रही है। बैठक में उत्तराखंड न केवल विकास से जुड़े नए मुद्दे उठाएगा, बल्कि पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई प्रगति की जानकारी भी साझा करेगा। राज्य सरकार के अनुसार, यह बैठक प्रशासनिक सुधार, सामाजिक कल्याण, आपदा प्रबंधन और आधारभूत ढांचे के लिहाज से बेहद अहम है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मध्य क्षेत्रीय परिषद में उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। परिषद का उद्देश्य राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाना, साझा समस्याओं का समाधान निकालना और विकास कार्यों की समीक्षा करना है। रायपुर में होने जा रही 17वीं स्थायी समिति की बैठक में पिछली बैठक के निर्णयों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और नए प्रस्तावों पर विचार होगा।
आधिकारिक जानकारी
बैठक में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व प्रमुख सचिव आरके सुधांशु और सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम सहित कुल छह वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। राज्य सरकार की ओर से ऐसे विषयों को प्रमुखता दी जाएगी, जिन पर लंबे समय से केंद्र के सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।
बैठक में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दे
राज्य सरकार हर जनपद में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना का प्रस्ताव रखेगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज खोलने के जनसंख्या मानकों में संशोधन की मांग की जाएगी, ताकि पर्वतीय और दूरस्थ जिलों को भी इसका लाभ मिल सके। सरकार का तर्क है कि पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों में मौजूदा मानक व्यावहारिक नहीं हैं।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान पेंशन राशि अपर्याप्त है और इसमें बढ़ोतरी से बुजुर्गों, दिव्यांगों और निराश्रित वर्ग को राहत मिलेगी।
निराश्रित गोवंशीय पशुओं के संरक्षण का विषय भी एजेंडे में शामिल है। उत्तराखंड सरकार गौशालाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत करने के लिए केंद्र से विशेष सहायता पैकेज की मांग करेगी।
आपदा प्रबंधन से जुड़े मामलों में राज्य सरकार आपदा मानकों में संशोधन का सुझाव देगी। विशेष रूप से विद्युत पावर हाउस, वितरण लाइन और अन्य विद्युत ढांचे को क्षति पहुंचने की स्थिति में उनके पुनर्निर्माण के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक मानक तय करने की मांग की जाएगी।
कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए मोदीपुरम से ऋषिकेश तक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजना के विस्तार का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके साथ ही हरिद्वार से हर्रावाल तक रेलवे लाइन के दोहरीकरण का मुद्दा भी चर्चा में रहेगा।
सिंचाई व्यवस्था को लेकर आपदा से क्षतिग्रस्त नहरों के पुनर्निर्माण के मानकों में संशोधन और धनराशि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा, जिससे किसानों को राहत मिल सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय जानकारों का कहना है कि यदि इन प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय होता है तो इससे स्वास्थ्य, परिवहन, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में राज्य को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग लंबे समय से की जा रही है।
आगे क्या होगा
बैठक में उठाए गए प्रस्तावों पर केंद्र और सदस्य राज्यों के साथ चर्चा के बाद निर्णय लिए जाएंगे। साथ ही पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा भी होगी। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस बैठक से उत्तराखंड के कई लंबित विकास कार्यों को गति मिलेगी।







