
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गोमुख से उत्तरकाशी तक भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के निर्देशों के विपरीत होटल और रिजॉर्ट निर्माण की अनुमति दिए जाने के मामले में गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार और सिंचाई विभाग से मंगलवार तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हिमालय की गोद में बसे भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में पिछले कुछ वर्षों से होटल, रिजॉर्ट और कैंपों के अवैध निर्माण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एनजीटी ने पहले ही इस क्षेत्र को पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील घोषित करते हुए निर्माण कार्यों पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद नदी किनारे व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार को लेकर अदालत में जनहित याचिका दायर की गई है।
कोर्ट की कार्यवाही
मामले की सुनवाई के दौरान डीएम उत्तरकाशी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उनके द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड से न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ और खंडपीठ ने कहा कि मंगलवार तक अद्यतन प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए।
कोर्ट ने राज्य सरकार और सिंचाई विभाग से यह भी पूछा कि एनजीटी के दिशा-निर्देशों का पालन किस स्तर तक किया गया है और अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता के तर्क
याचिकाकर्ता हिमालयन नागरिक दृष्टि मंच की ओर से कहा गया कि —
“राज्य सरकार ने बिना वैज्ञानिक सर्वे के नदी किनारे होटल और रिजॉर्ट निर्माण की अनुमति दी है। यह न केवल एनजीटी निर्देशों का उल्लंघन है बल्कि हर साल आने वाली बाढ़ आपदाओं का बड़ा कारण भी है।”
उन्होंने मांग की कि इको सेंसिटिव जोन में नए निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए और पहले से हो रहे निर्माण की जांच की जाए।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि जिन क्षेत्रों में अनुमति दी गई है, वहां सर्वे और पर्यावरणीय आकलन की प्रक्रिया पूरी की गई थी। हालांकि अदालत ने सरकार के उत्तर को अपर्याप्त मानते हुए कहा कि पूर्ण सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
कोर्ट का रुख और निर्देश
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाढ़ क्षेत्र अधिनियम का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से जन-धन की हानि कम हो सके। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण करें और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
आगे की सुनवाई
कोर्ट ने सभी पक्षों को मंगलवार तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद अगली सुनवाई में तय होगा कि सरकार और विभागों ने एनजीटी के दिशा-निर्देशों का पालन किस हद तक किया है।




