
रुद्रप्रयाग: जखोली ब्लॉक के मयाली–गुप्तकाशी मार्ग पर गैस गोदाम के पीछे एक भालू झाड़ियों में लगे तार में फंस गया। करीब छह घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद उसे मुक्त किया जा सका, लेकिन होश में आते ही भालू पिंजरे में कैद होने से पहले ही पहाड़ी ढलान की ओर लुढ़ककर जंगल में भाग गया। वन विभाग की टीमें अभी भी उसकी गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
घटना शुक्रवार सुबह सामने आई जब बड़मा–मुन्ना देवल गांव के पास घास लेने जा रहे ग्रामीणों ने गैस गोदाम के पीछे झाड़ियों में एक बड़े भालू को तार में फंसा देखा। जानकारी मिलते ही वन विभाग और पशुपालन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। क्षेत्र में भालुओं की सक्रियता पहले भी देखी गई है, लेकिन इस तरह का फंसने का मामला पहली बार आया।
रेस्क्यू अभियान कैसे चला
उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. दिवाकर पंत के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। भालू करीब 150 किलो का था और तार में बुरी तरह उलझा हुआ था, जिससे उसकी हरकत सीमित हो गई थी। टीम ने सबसे पहले स्थिति का आकलन किया और फिर भालू को शांत करने के लिए ट्रेंकुलाइज करने की प्रक्रिया शुरू की।
तीन राउंड ट्रेंकुलाइज के बाद भालू बेहोश हुआ, हालांकि उसके शरीर में हलचल बनी रही। वनकर्मियों ने पिंजरा सामने रखकर सावधानीपूर्वक तार को काटना शुरू किया। तार हटते ही भालू ढलान से नीचे लुढ़क गया और कुछ ही देर में होश में आ गया।
जंगल की ओर भाग गया भालू
जैसे ही भालू उठकर खड़ा हुआ, वह पिंजरे से पहले ही तेजी से जंगल की ओर भाग गया। वन विभाग की टीम उसे पकड़ने की स्थिति में नहीं थी, लेकिन यह राहत की बात थी कि भालू बिना किसी गंभीर चोट के सुरक्षित भाग निकला।
उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. पंत ने बताया कि रेस्क्यू बेहद चुनौतीपूर्ण था। तार की पकड़ गहरी थी और भालू काफी तनाव में था। ढलान से गिरने के बाद भालू को होश आ गया और वह तुरंत जंगल की तरफ भाग गया। विभाग ने कहा कि यह एक नर भालू था, जिसकी गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में भालू की आवाजाही पहले भी देखी गई है, लेकिन इस तरह फंसने की घटना ने उन्हें डरा दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि अगर भालू गुस्से में होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।
वन विभाग की निगरानी
वन विभाग ने क्षेत्र में छह टीमें तैनात की हैं, जो भालू की गतिविधि पर नजर रख रही हैं। ड्रोन और कैमरा ट्रैप भी लगाए जा रहे हैं ताकि भालू की दिशा और स्थिति का सही पता चल सके।
डॉ. पंत ने कहा कि इलाके में जंगली जानवर अक्सर भोजन की तलाश में आबादी के पास पहुंच जाते हैं। विभाग लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी वन्यजीव संबंधित घटना की तुरंत सूचना देने की अपील कर रहा है।







