
ऋषिकेश: ऋषिकेश के आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए राहत भरी खबर है। बैराज-चीला मोटर मार्ग पर बीन नदी के ऊपर बनने वाले मोटर पुल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग दुगड्डा की ओर से लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल का निर्माण किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह पुल कुम्भ मेले से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्षेत्र के हजारों लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
बीन नदी पर मोटर पुल बनने से गंगा भोगपुर, चीला, डांडा मंडल और ताल घाटी क्षेत्र के करीब पांच हजार लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। वर्तमान में बरसात के मौसम में बीन नदी के उफान पर आने से डांडामंडल क्षेत्र का ऋषिकेश से संपर्क कई बार बाधित हो जाता है। पुल बनने के बाद वर्षभर लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
कांवड़ और चारधाम यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण
यह पुल बैराज-चीला मार्ग के बीच बीन नदी पर बनाया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ कांवड़ यात्रा और चारधाम यात्रा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी। प्रशासन का मानना है कि यह पुल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।
डबल लेन पुल होगा, 150 मीटर लंबाई
निर्माणाधीन मोटर पुल डबल लेन का होगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 150 मीटर और चौड़ाई करीब 12 मीटर रखी गई है। पुल बनने से भारी वाहनों और यात्री वाहनों के आवागमन में भी आसानी होगी।
लंबे समय से हो रही थी पुल की मांग
गंगा भोगपुर गांव के पास बीन नदी पर पुल निर्माण की मांग राज्य गठन के बाद से लगातार उठती रही है। करीब सात वर्ष पहले यमकेश्वर क्षेत्र में आयोजित गेंद मेले के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यहां पुल निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद वन्यजीव क्षेत्र से जुड़े होने के कारण राज्य और केंद्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमति मिलने में समय लगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
लोक निर्माण विभाग दुगड्डा के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह के अनुसार बीन नदी पर पुल का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसे तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुम्भ मेला शुरू होने से पहले पुल को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है और निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से बरसात के दौरान होने वाली परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। लोगों को अब ऋषिकेश आने-जाने के लिए लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा।







