
टिहरी (नरेंद्रनगर): ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेलवे लाइन से प्रभावित टिहरी जिले के नरेंद्रनगर विकासखंड स्थित बल्याखान गांव में रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने प्रभावित मकानों की फोटोग्राफी करने के साथ ही ग्रामीणों से बातचीत की और जल्द ही भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम के साथ विस्तृत निरीक्षण का आश्वासन दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सुरंग खुदाई के दौरान उनके मकानों में दरारें आई हैं, जिससे भविष्य में जान-माल का खतरा बढ़ सकता है। मामले को लेकर प्रशासन और रेल विकास निगम से ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को लेकर पहाड़ी क्षेत्रों में भू-धंसाव और मकानों में दरारों की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। बल्याखान गांव में भी सुरंग निर्माण के बाद कई घरों में संरचनात्मक क्षति होने की बात ग्रामीण लंबे समय से उठा रहे हैं। इसी क्रम में प्रभावित लोगों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की थी।
आधिकारिक जानकारी
सोमवार को रेल विकास निगम लिमिटेड के उप महाप्रबंधक भूपेंद्र कुमार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम बल्याखान गांव पहुंची। टीम ने 14 परिवारों के 18 मकानों का निरीक्षण कर दरारों की फोटोग्राफी की। हालांकि निरीक्षण के दौरान न तो रेल विकास निगम के भूगर्भ वैज्ञानिक मौजूद थे और न ही लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर के अभियंता। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम के साथ दोबारा निरीक्षण किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी विमला देवी ने बताया कि 26 नवंबर को प्रभावित ग्रामीण जिलाधिकारी टिहरी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। जिलाधिकारी के निर्देश पर ही रेल विकास निगम की टीम गांव में निरीक्षण के लिए आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें समय रहते विस्थापित नहीं किया गया तो ट्रेन संचालन शुरू होने के बाद दरारें और चौड़ी हो सकती हैं, जिससे कई मकान जमींदोज होने का खतरा है।
भूगर्भीय रिपोर्ट को लेकर सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि 27 अगस्त 2025 को रेल विकास निगम की टीम भूगर्भ वैज्ञानिकों के साथ गांव पहुंची थी और दरारों की जांच की गई थी। इसके बावजूद चार महीने बीत जाने के बाद भी उस भूगर्भीय रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। ग्रामीण रिपोर्ट सार्वजनिक करने और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आंकड़े / तथ्य
निरीक्षण में 14 परिवारों के 18 मकान शामिल रहे।
भूगर्भीय जांच 27 अगस्त 2025 को की गई थी।
शिकायत 26 नवंबर को जिलाधिकारी कार्यालय में दी गई थी।
आगे क्या?
रेल विकास निगम ने जल्द भूगर्भ वैज्ञानिकों के साथ पुनः निरीक्षण का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि भूगर्भीय रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और खतरे की स्थिति को देखते हुए उचित मुआवजा या विस्थापन की ठोस योजना बनाई जाए।






