
पांडुकेश्वर (चमोली): श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बुधवार को उद्धव जी और कुबेर जी पांडुकेश्वर स्थित अपने शीतकालीन गद्दी स्थल पर पहुंच गए, जहां विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना के बाद उन्हें योग-ध्यान बदरी मंदिर और कुबेर मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया। बदरीनाथ धाम से गद्दी के आगमन पर स्थानीय ग्रामीणों और समितियों ने पारंपरिक स्वागत किया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बद्रीनाथ धाम के कपाट हर वर्ष शीतकाल में बंद हो जाते हैं, जिसके बाद देवताओं की शीतकालीन गद्दी पांडुकेश्वर लायी जाती है। यहां अगले छह महीनों तक उद्धव जी और कुबेर जी की पूजा-अर्चना संपन्न होती है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ी है।
आधिकारिक जानकारी
बुधवार प्रातः काल बद्रीनाथ धाम में विशेष पूजा के बाद मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी और धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल की अगुवाई में उद्धव जी, कुबेर जी और शंकराचार्य गद्दी की यात्रा पांडुकेश्वर के लिए प्रारंभ हुई। पांडु नगरी पहुंचने पर कुबेर देवरा समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर गद्दी का स्वागत किया।
पूजा-अर्चना के बाद कुबेर जी की मूर्ति को कुबेर मंदिर और उद्धव जी की मूर्ति को योग-ध्यान बदरी मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया गया। अब अगले छह माह तक शीतकालीन पूजाएं यहीं संपन्न होंगी। इस दौरान बीकेटीसी समिति ने पुजारियों और पदाधिकारियों का सम्मान भी किया।
अद्यतन के अनुसार, गुरुवार को आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर पहुंचेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पांडुकेश्वर में गद्दी के आगमन को लेकर भारी उत्साह देखा गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि शीतकालीन पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रमुख हिस्सा है। कई ग्रामीणों ने बताया कि शीतकाल में यहां पूजा और दर्शन से श्रद्धालुओं का आना-जाना बढ़ता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलता है।
धार्मिक संदर्भ
मंगलवार को भू-बैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। इसके साथ ही शीतकालीन यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। बदरी विशाल की पूजा पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ में संपन्न होगी। इसी प्रकार बाबा केदारनाथ की शीतकालीन पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में, मां गंगा की आराधना मुखबा में और मां यमुना की पूजा खरसाली में की जाती है।
अगला कदम / आगे क्या
पांडुकेश्वर में शीतकालीन पूजा प्रारंभ हो चुकी है। बीकेटीसी और मंदिर समितियां आगामी महीनों के लिए पूजा प्रबंधन, दर्शनों की व्यवस्था और सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप दे रही हैं। अगले दिनों में भगवान नृसिंह मंदिर में शंकराचार्य गद्दी के आगमन के साथ शीतकालीन धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत और बढ़ेगी।







