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चमोली: बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत पंच पूजाओं का तीसरा दिन आज संपन्न हो रहा है। रविवार को गर्भगृह में वेद-उपनिषदों की पूजा के बाद देर शाम वेद ऋचाओं का वाचन शीतकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा। इस पूजा क्रम में मुख्य पुजारी बंदे रावल अमरनाथ नंबूदरी और बीकेटीसी अधिकारी उपस्थित रहे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के प्रमुख धामों में शीतकालीन अवकाश से पहले वैदिक परंपराओं के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बदरीनाथ धाम में पंच पूजा की प्रक्रिया कपाट बंद होने से पूर्व महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा मानी जाती है, जिसमें वेद-उपनिषदों का वाचन, विशेष अभिषेक और वैदिक कर्म शामिल हैं।
अधिकारिक जानकारी
रविवार सुबह पंच पूजा के तीसरे दिन मुख्य पुजारी बंदे रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट और बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की उपस्थिति में वेद उपनिषद ग्रंथों को गर्भगृह में पूजा हेतु सौंपा गया।
देर शाम इन वेदग्रंथों को गर्भगृह से धर्माधिकारियों और वेदपाठियों के सुपुर्द कर विधिवत रूप से बंद कर दिया जाएगा। इसके साथ ही आज से बदरीनाथ धाम में वेद ऋचाओं का वाचन शीतकाल हेतु रुक जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि नित्य पूजा और अभिषेक पूजन का क्रम शीतकाल के अंतिम दिन तक जारी रहेगा। कुछ अधिकारी विस्तृत टिप्पणी करने से बचते दिखे, लेकिन कपाट बंदी की तैयारियों को अंतिम चरण में बताया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि कपाट बंदी का समय धाम और आसपास के क्षेत्रों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। कई दुकानदारों और तीर्थ यात्रियों ने कहा कि पंच पूजाओं का दृश्य हर वर्ष भक्तों में गहरी आस्था का संचार करता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आज धाम में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से अधिक दिखाई दी।
वैदिक प्रक्रिया और परंपरा
वेद वाचन बंद होने के साथ ही शीतकाल में नर-नारायण, गंधमादन पर्वत और बदरीपुरी की कंदराओं में वेद ध्वनियों की गूंज नहीं सुनाई देगी। यह परंपरा धाम की शीतकालीन शांति और धार्मिक रीति-रिवाजों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
25 नवंबर को शुभ मुहूर्त पर भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद किए जाएंगे। उससे पहले बीकेटीसी द्वारा सभी वैदिक प्रक्रियाओं का विधिवत निर्वहन किया जा रहा है।
डेटा / संख्या
- कुल दर्शनीय श्रद्धालु (22 नवंबर 2025 तक): 16,42,510
- पुरुष: 9,05,522
- महिला: 6,10,604
- बच्चे: 1,26,384
- कपाट बंद होने की तिथि: 25 नवंबर 2025
अब आगे क्या?
आगामी दिनों में कपाट बंदी की अंतिम तैयारियाँ तेज होंगी। बीकेटीसी और मंदिर प्रशासन आवश्यक व्यवस्थाएँ पूरी कर रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समयानुसार पूजा-अर्चना में शामिल हों और शीतकालीन प्रबंधन का पालन करें।







