oplus_1048576
बदरीनाथ (चमोली), बदरीनाथ धाम में शीतकालीन अवकाश की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। मंदिर के कपाट कल, 25 नवंबर को विधि-विधान के साथ बंद किए जाएंगे। इसके लिए माणा गांव की महिलाओं और कन्याओं द्वारा तैयार विशेष घृत कंबल मंदिर समिति को सौंप दिया गया है, जिसे कपाट बंद होते समय भगवान बदरीविशाल को ओढ़ाया जाएगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बदरीनाथ धाम भगवान विष्णु का प्रमुख तीर्थस्थल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। शीतकाल में भारी हिमपात के कारण मंदिर के कपाट बंद करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कपाट बंद होने पर भगवान बदरीविशाल को घृत कंबल ओढ़ाने की प्राचीन परंपरा भी इसी आस्था और हिमालयी जीवन परंपराओं से जुड़ी है।
आधिकारिक जानकारी
बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर की सुबह निर्धारित समय पर बंद होंगे। कपाट बंद करने से एक दिन पूर्व माणा गांव में तैयार घृत कंबल को बदरी–केदार मंदिर समिति को सौंप दिया गया। यह कंबल गाय के घी और केसर से लेपित किया जाता है और शीतकाल में प्रतीकात्मक रूप से भगवान को गर्माहट प्रदान करने की परंपरा का हिस्सा है।
कंबल बनाने की प्रक्रिया अत्यंत विशिष्ट है। कार्तिक माह में शुभ दिन तय कर गांव की महिलाएं और कन्याएं केवल एक ही दिन में ऊन कातकर इसे तैयार करती हैं। इस दिन महिलाएं उपवास रखकर पूरी श्रद्धा के साथ कंबल निर्माण में जुटती हैं। तैयार कंबल को फिर धार्मिक विधियों के साथ मंदिर को समर्पित किया जाता है।
कपाट बंद होने के अवसर पर बदरीनाथ गर्भगृह से उद्धव जी और कुबेर जी की उत्सव मूर्तियों को पांडुकेश्वर स्थित योग–ध्यान बदरी मंदिर के लिए रवाना किया जाएगा, जहाँ शीतकाल में पूजा-अर्चना जारी रहती है।
अधिकारियों ने बताया कि कपाट बंद होने की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। मंदिर परिसर में भक्तों की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर मंदिर समिति और प्रशासन सतर्क है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि घृत कंबल निर्माण की परंपरा माणा गांव की सांस्कृतिक पहचान है। ग्रामीण मानते हैं कि इस परंपरा से नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति, लोकमान्यताओं और देवभूमि की परंपराओं से जुड़ती है। श्रद्धालुओं ने बताया कि कपाट बंद होने का दिन भावुक क्षण होता है, लेकिन यह अगले वर्ष कपाट खुलने तक भक्तों के भीतर आस्था और उम्मीद बनाए रखता है।
आगे क्या
कपाट बंद होने के बाद छह महीनों तक बदरीनाथ धाम बर्फबारी के बीच बंद रहेगा। इस अवधि में भगवान बदरीविशाल की पूजा योग–ध्यान बदरी मंदिर, पांडुकेश्वर में होगी। अगले वर्ष अप्रैल–मई में कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु पुनः मुख्य धाम में दर्शन कर सकेंगे।







