
देहरादून: भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम की शिकायत पर डालनवाला थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अंकिता भंडारी से जुड़ी विवादित सोशल मीडिया पोस्ट और उन पर किए गए आपत्तिजनक कमेंट पुलिस की जांच के दायरे में आ गए हैं। आरोप है कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अंकिता के नाम का उपयोग कर उत्तराखंड में दंगे भड़काने और भारतीय जनता पार्टी की छवि खराब करने की साजिश रची गई। मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर अंकिता भंडारी से जुड़ी कई पोस्ट और कथित ऑडियो के आधार पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इन पोस्टों को लेकर प्रदेश में तनावपूर्ण माहौल बनने की आशंका जताई गई, जिसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
आधिकारिक जानकारी
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर विवादित पोस्ट साझा कर और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर शांति व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जाए और यह भी देखा जाए कि पोस्ट और कमेंट करने के पीछे संबंधित व्यक्तियों की मंशा क्या थी।
जांच की स्थिति
सूत्रों के अनुसार, पुलिस प्राथमिक चरण में उन सोशल मीडिया हैंडल और पोस्ट की जांच कर रही है, जिनका सीधा संबंध प्राथमिकी में दर्ज आरोपों से है। पुलिस का मुख्य फोकस डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने पर है, ताकि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या कानूनी बाधा न आए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी के साथ टिप्पणी होनी चाहिए। लोगों ने उम्मीद जताई है कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि किसी ने जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा
डिजिटल साक्ष्य एकत्र होने के बाद पुलिस संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने या किसी दल अथवा व्यक्ति विशेष की छवि धूमिल करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







