
देहरादून में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सीबीआई जांच की घोषणा और एजेंसी को पत्र भेजे जाने के बावजूद राजनीतिक हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। 10 जनवरी को कांग्रेस के मशाल जुलूस और 11 जनवरी को ‘उत्तराखंड बंद’ के आह्वान के बाद भी विपक्ष और सामाजिक संगठन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। उधर, सत्ता पक्ष इस निर्णय को जनभावनाओं के अनुरूप बता रहा है, जबकि विपक्ष सरकार की मंशा और देरी पर सवाल उठा रहा है। इस बीच ‘बाहरी शक्तियों’ के आरोप ने सियासत को और तेज कर दिया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर ऑडियो साझा किए जाने के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आया और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। शुरुआत से ही कांग्रेस और कई सामाजिक संगठन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग करते रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही कहा था कि सरकार अंकिता के माता-पिता की भावना के अनुरूप निर्णय लेगी। इसी क्रम में 9 जनवरी को सीबीआई जांच की मंजूरी दी गई और 12 जनवरी को उत्तराखंड शासन ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को औपचारिक पत्र भेज दिया। पत्र में वीआईपी की भूमिका की जांच का अनुरोध भी शामिल है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी से जुड़ा कोई निर्णय अब तक सामने नहीं आया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच का दायरा और निगरानी स्पष्ट न होने से संदेह बना हुआ है। कई नागरिकों का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निगरानी तंत्र पर भी स्पष्ट फैसला होना चाहिए।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि मुद्दे खत्म होने पर कुछ तंत्र राज्य का माहौल बिगाड़ने में लगे रहते हैं और कांग्रेस सहित कुछ दल ‘बाहरी शक्तियों’ के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद ने पलटवार करते हुए कहा कि अंकिता उत्तराखंड की बेटी थी और उसकी आवाज उठाना विपक्ष का दायित्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हर मामले में ‘बाहरी’ का नाम लेकर असल सवालों से ध्यान भटकाती है। कांग्रेस की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में सीबीआई जांच हो, ताकि वीआईपी की भूमिका सहित सभी पहलू साफ हो सकें।
आगे क्या होगा
सीबीआई को पत्र भेजे जाने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट निगरानी की मांग पर सरकार क्या रुख अपनाती है, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के आंदोलन आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।







