
ऋषिकेश: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश (एम्स) ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के दंत चिकित्सा विभाग की मुख एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी टीम ने जबड़े के जोड़ के संलयन (टीएमजे एंकिलोसिस) और गंभीर चेहरे की विषमता से पीड़ित एक किशोर का बिना किसी कृत्रिम जबड़े के जोड़ के सफल उपचार किया है। जटिल सर्जरी के बाद मरीज का मुंह 41 मिमी तक खुलने लगा और चेहरे की विकृति पूरी तरह संतुलित हो गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज अब सामान्य जीवन जी रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
बीते नवंबर माह में सहारनपुर निवासी एक किशोर को उपचार के लिए एम्स लाया गया था। उसका चेहरा अत्यधिक विकृत था और मुंह बिल्कुल नहीं खुल रहा था। दंत विभाग के विशेषज्ञ डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ ने बताया कि मरीज का निचला जबड़ा लगभग दो सेंटीमीटर पीछे खिसका हुआ था, जिससे चेहरा असंतुलित हो गया था। इस स्थिति का मानसिक और सामाजिक प्रभाव भी पड़ रहा था।
सामान्यतः ऐसे मामलों में कृत्रिम जोड़ प्रत्यारोपण किया जाता है, लेकिन इस चुनौतीपूर्ण केस में टीम ने बिना कृत्रिम जोड़ लगाए सर्जरी करने का निर्णय लिया।
सात घंटे की मैराथन सर्जरी
डॉ. राठौड़ के अनुसार, सर्जरी बहु-स्तरीय और अत्यंत जटिल थी। एक्स-रे और सीटी स्कैन की बारीकी से जांच कर कंप्यूटर पर सर्जरी की विस्तृत योजना बनाई गई। जबड़े के संलयन को मुक्त कर चेहरे को संतुलित आकार दिया गया।
पूरी प्रक्रिया में करीब 7 घंटे का समय लगा। सर्जरी के बाद मरीज का मुंह 41 मिमी तक खुलने लगा और चेहरे की विषमता दूर हो गई।
क्या होता है टीएमजे एंकिलोसिस
टीएमजे एंकिलोसिस एक गंभीर स्थिति है, जिसमें जबड़े का जोड़ हड्डी या रेशेदार ऊतक के कारण आपस में जुड़ जाता है। इससे मुंह खुलना बंद हो जाता है, चबाने और बोलने में दिक्कत होती है और चेहरे की विकृति उत्पन्न हो सकती है। इसका मुख्य कारण चोट, आघात या कान का संक्रमण हो सकता है।
चिकित्सकों ने लौटाई मुस्कान
डॉ. राठौड़ ने बताया कि मरीज की आर्थिक स्थिति सीमित थी और कृत्रिम जोड़ प्रत्यारोपण पर अधिक खर्च आता। टीम ने चुनौती स्वीकार करते हुए बिना ज्वाइंट लगाए सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद चार माह तक मरीज की नियमित निगरानी की गई।
अब किशोर आत्मविश्वास के साथ स्कूल जा रहा है और उसका चेहरा काफी हद तक सामान्य हो चुका है।
संस्थान की प्रतिक्रिया
एम्स की निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि दंत विभाग की टीम ने कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान का लक्ष्य मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं और उन्नत तकनीक आधारित उपचार उपलब्ध कराना है।
सर्जरी टीम में डीन अकादमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, एमएस डॉ. सत्या श्री बलिजा, विभागाध्यक्ष डॉ. आशी चुग सहित कई विशेषज्ञ शामिल रहे।
आगे क्या होगा
एम्स प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी जटिल मामलों में उन्नत तकनीकों का उपयोग कर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। टीम ने इस सर्जरी को चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
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