
ऋषिकेश: ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में तीमारदारों को उपचार बिल का ऑनलाइन भुगतान न मिल पाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को पत्नी के उपचार के बाद डिस्चार्ज के समय एक तीमारदार को बिल भुगतान के लिए नकद की व्यवस्था करने हेतु करीब पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ा। अन्य विकल्प न होने के कारण उसे करीब एक घंटे तक मरीज को अकेला छोड़ना पड़ा। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए पहचाने जाने वाले एम्स ऋषिकेश में इस तरह की मूलभूत सुविधा बाधित होने से व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
एम्स ऋषिकेश में देशभर से मरीज उपचार के लिए आते हैं। लंबी दूरी तय कर पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए समय पर भुगतान और सरल प्रक्रियाएं बेहद अहम होती हैं। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिए जाने के दौर में ऑनलाइन मोड का बाधित होना असुविधा और जोखिम दोनों बढ़ाता है।
आधिकारिक जानकारी
एम्स ऋषिकेश के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलोय मोहंती ने बताया कि मरीजों और तीमारदारों को भुगतान के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। उनके अनुसार, संभव है कि उस समय ऑनलाइन मोड में सर्वर संबंधी तकनीकी समस्या आ रही हो, जिसके कारण ऑनलाइन भुगतान नहीं लिया गया हो।
स्थानीय / मानवीय आवाजें
पीड़ित तीमारदार विनोद, निवासी मुरादाबाद, ने बताया कि उनकी पत्नी ब्रेस्ट कैंसर की मरीज हैं और मंगलवार को एम्स में भर्ती कराई गई थी। शनिवार को डिस्चार्ज के बाद जब वे करीब आठ हजार रुपये का बिल ऑनलाइन चुकाने पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
विनोद का कहना है कि एटीएम न होने और नकद की मजबूरी में उन्हें कई दुकानदारों से ऑनलाइन ट्रांसफर के बदले नकद लेने का अनुरोध करना पड़ा, लेकिन मदद नहीं मिली। अंततः दून तिराहे के पास एक व्यापारी ने नकद देकर सहायता की, तब जाकर भुगतान संभव हो सका।
आंकड़े / तथ्य
पीड़ित को नकद भुगतान की व्यवस्था के लिए लगभग 5 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी और करीब एक घंटे तक मरीज को अकेला छोड़ना पड़ा। बिल की राशि लगभग 8,000 रुपये बताई गई है।
आगे क्या होगा
एम्स प्रशासन का कहना है कि तकनीकी दिक्कतें अस्थायी हो सकती हैं। ऐसे में अपेक्षा की जा रही है कि ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था को स्थायी और निर्बाध बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में मरीजों और तीमारदारों को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।




