
ऋषिकेश: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के गेट नंबर तीन के बाहर कथित तौर पर खून की व्यवस्था के नाम पर वसूली का मामला सामने आया है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के बरेली से आए एक मरीज के तीमारदार से एक यूनिट रक्त के बदले तीन हजार रुपये ले लिए गए। मामला तब खुला जब दूसरी बार रक्तदान के लिए भेजे गए युवक को इस लेन-देन की जानकारी ही नहीं थी और ब्लड बैंक कर्मियों को संदेह हुआ। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
जानकारी के अनुसार बरेली निवासी मरीज का ऑपरेशन होना था, जिसके लिए कुछ यूनिट रक्त की आवश्यकता थी। तीमारदार ब्लड डोनर की तलाश कर रहा था। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उसे बताया कि गेट नंबर तीन के पास कोई व्यक्ति रक्त की व्यवस्था कर देगा।
तीमारदार एजेंट से मिला, जिसने तीन हजार रुपये लेकर एक युवक से रक्तदान करवा दिया। कुछ समय बाद फिर एक यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी तो तीमारदार दोबारा उसी एजेंट के पास पहुंचा। इस बार एजेंट ने यह कहकर अधिक धनराशि की मांग की कि रक्तदाता के लिए घी और जूस की व्यवस्था करनी होगी।
मामला कैसे खुला
दूसरी बार रक्तदान के लिए आए छात्र को यह जानकारी नहीं थी कि उसके रक्त के बदले पैसे लिए गए हैं। ब्लड बैंक में तैनात कर्मचारी को स्थिति संदिग्ध लगी। पूछताछ में तीमारदार ने एजेंट को पैसे देने की बात स्वीकार कर ली।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस रक्तदान करने आए युवक को पूछताछ के लिए चौकी ले गई। पैसे लेने वाला एजेंट मौके से फरार बताया जा रहा है।
कोतवाली प्रभारी केसी भट्ट ने कहा कि एक युवक से पूछताछ की जा रही है और फरार एजेंट की तलाश की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कुछ लोगों का कहना है कि अस्पतालों के बाहर इस तरह की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि रक्तदान जैसी मानवीय प्रक्रिया को अवैध कमाई का जरिया बनाना गंभीर चिंता का विषय है।
आगे क्या होगा
पुलिस फरार एजेंट की तलाश कर रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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