
पिथौरागढ़ / आदि कैलाश क्षेत्र: राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर रविवार को उत्तराखंड के आदि कैलाश क्षेत्र 14500 फीट की ऊंचाई) पर राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन का ऐतिहासिक आयोजन हुआ। देश के 22 राज्यों से 700 से अधिक प्रतिभागियों ने इस चुनौतीपूर्ण ट्रैक पर साहस, फिटनेस और हिमालयी जज़्बे का प्रदर्शन किया।
महिला वर्ग में पौड़ी गढ़वाल की मीनाक्षी और पुरुष वर्ग में चमोली के दिगंबर सिंह ने 60 किलोमीटर लंबी दौड़ में प्रथम स्थान हासिल किया।
14,500 फीट पर साहसिक आयोजन
60 किमी लंबी अल्ट्रा मैराथन का शुभारंभ ज्योलिंगकांग (आदि कैलाश क्षेत्र) से किया गया, जहां तापमान शून्य के करीब था और ऊंचाई करीब 14500 फीट। यह दौड़ कालापानी से होते हुए गुंजी तक आयोजित की गई, जो 10,000 से 14,000 फीट के बीच के बेहद कठिन हिमालयी ट्रैक से होकर गुजरी।
इस दौरान प्रतिभागियों ने बर्फीली हवाओं और ऊंचाई की चुनौतियों के बीच अद्भुत धैर्य, अनुशासन और फिटनेस का परिचय दिया।
महिला और पुरुष वर्ग के विजेता
- महिला वर्ग: पौड़ी गढ़वाल की मीनाक्षी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 60 किलोमीटर की रेस में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- पुरुष वर्ग: चमोली जिले के दिगंबर सिंह ने बेहतरीन समय के साथ पहला स्थान हासिल किया।
दोनों विजेताओं को राज्य सरकार की ओर से सम्मानित किया गया और उन्हें ट्रॉफी व प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
उद्घाटन और आयोजन
मैराथन का उद्घाटन सुबह 6 बजे केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री अजय टम्टा और अन्य अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर किया। आयोजन को लेकर क्षेत्र में स्थानीय जनता में भारी उत्साह देखने को मिला। लोगों ने रास्तेभर धावकों का स्वागत कर उनका उत्साह बढ़ाया।
“यह केवल खेल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की साहसिक भावना का प्रतीक है,” — अजय टम्टा, केंद्रीय राज्यमंत्री
सेना और आईटीबीपी का सहयोग
दौड़ के सफल और सुरक्षित आयोजन में भारतीय सेना और आईटीबीपी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने मार्ग सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और मार्गदर्शन की व्यवस्था की। प्रतिभागियों ने आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन की सराहना की।
पर्यटन और खेल का संगम
राज्य सरकार ने इस आयोजन को साहसिक खेल, आध्यात्मिकता और पर्यटन को एक साथ जोड़ने वाला कार्यक्रम बताया। आदि कैलाश क्षेत्र, जो स्वयं शिव धाम और धार्मिक तीर्थ का प्रतीक है, अब एडवेंचर टूरिज़्म और फिटनेस टूरिज़्म के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इस आयोजन ने न केवल उत्तराखंड की खेल क्षमता और साहसिक पहचान को मजबूत किया, बल्कि राज्य स्थापना की रजत जयंती को एक नए युग की शुरुआत में बदल दिया।
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