
रुद्रप्रयाग: भरदार पट्टी के दर्जनों गांवों और प्रसिद्ध मां मठियाणा मंदिर को जोड़ने वाला जवाड़ी मोटरमार्ग इन दिनों गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है। बरसात के बाद भूधंसाव और टूट-फूट के कारण मार्ग पर किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। रोजाना इसी मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों और स्कूली बच्चों में लगातार भय बना हुआ है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जवाड़ी–रौठिया, दरमोला, सौंराखाल समेत भरदार पट्टी के दर्जनों गांवों के लिए यह मार्ग जीवनरेखा माना जाता है। बरसाती सीजन के दौरान हुए भूधंसाव के बाद सड़क कई स्थानों पर पूरी तरह ध्वस्त हो गई। जिला मुख्यालय के नजदीक होने के बावजूद सड़क की यह हालत लंबे समय से क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा रही है।
अधिकारिक जानकारी
लोनिवि के अधिशासी अभियंता इन्द्रजीत बोस ने बताया कि भूधंसाव के कारण मार्ग को भारी नुकसान हुआ है। उनके अनुसार सड़क के दुरुस्तीकरण के लिए लगभग 55 लाख रुपये की आवश्यकता है, जबकि सुरक्षित वाहनों की आवाजाही के लिए 20 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट जरूरी है। विभाग सड़क सुधार के लिए डीपीआर तैयार कर रहा है।
हाल ही में जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने भी अधिकारियों के साथ इस मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया और जल्द से जल्द सुधार योजना बनाकर कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि रोज़ वाहन फंसते हैं और दोपहिया चालक गिरकर घायल हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “हम हर दिन जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरते हैं। अगर समय रहते सड़क ठीक नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।”
स्कूल जाने वाले बच्चे भी लगातार खतरे का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर सड़क वाशआउट हो चुकी है और गड्ढों से भरी है, जिससे छोटे वाहनों का चलना मुश्किल हो गया है।
मानवीय आवाज – छात्रों की अपील
राइंका जवाड़ी के छात्रों अनुराग और रोहन ने सोशल मीडिया के माध्यम से डीएम प्रतीक जैन से सड़क सुधार की औपचारिक अपील की है। बच्चों ने संदेश भेजते हुए कहा— “डीएम सर, प्लीज हमारी स्कूल वाली सड़क को ठीक कर दीजिए। कुछ दिन पहले यहां एक स्कूली दुर्घटना भी हुई, जिसमें एक युवक घायल हुआ था।”
आगे क्या?
लोनिवि जल्द ही डीपीआर को अंतिम रूप देकर उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है। डीएम के निरीक्षण के बाद उम्मीद बढ़ी है कि सड़क मरम्मत कार्य को प्राथमिकता में रखा जाएगा। स्थानीय लोग चाहते हैं कि राहत कार्य तुरंत शुरू हो, ताकि आने वाले महीनों में बड़े हादसे टाले जा सकें।




