
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में आज एक अनोखा मोड़ देखने को मिला, जहाँ विकास, योजनाओं और मुद्दों की जगह कुंडली, ग्रह-दोष और हस्तरेखा चर्चा का प्रमुख विषय बन गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और नेताओं की टिप्पणियाँ राज्य की राजनीति को एक नए, व्यंग्यात्मक मोड़ पर ले गई हैं, जिसे लेकर जनता में भी कई सवाल उठ रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के दिनों में राजनीतिक बहसों के केंद्र में रोजगार, महंगाई और विकास जैसे विषय रहे, लेकिन अब राज्य में एक अलग ही चर्चा जोर पकड़ रही है—ज्योतिष और राजनीति का मिश्रण।
नेताओं के बयानों और वीडियो ने इस बहस को और तीखा कर दिया है, जिसे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।
मुख्य घटना: हरक सिंह रावत का वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की हस्तरेखा देखकर भविष्यवाणी करते दिखाई देते हैं।
वीडियो में रावत हाथ की रेखाएँ नापते, ग्रह-दोष पर चर्चा करते और राजनीतिक संकेत देते दिख रहे हैं, जबकि ठुकराल उनकी बातों पर हामी भरते नज़र आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह वीडियो राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम जनता में भी चर्चा का विषय बन गया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि “काश, हरक सिंह रावत अपनी कुंडली भी जोड़ लेते।”
उन्होंने यह तक कहा कि रावत की कुंडली में नाड़ी षडाष्टक दोष है, इसीलिए वे किसी भी पार्टी में टिक नहीं पाते।
उन्होंने मजाकिया लहजे में राजनीतिक दल बदलने को “ग्रहों की चाल” से जोड़ दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी चुनावों से पहले मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली नई शैली के रूप में देखी जा सकती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नेताओं को जनता के वास्तविक मुद्दों—बेरोजगारी, महंगाई, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं—पर बात करनी चाहिए, न कि एक-दूसरे की कुंडली और ग्रह-दोष पर।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर राजनीति अब ज्योतिष पर आधारित हो गई, तो भविष्य की नीति और नेतृत्व के फैसलों को लेकर और भ्रम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि “ज्योतिषीय टिप्पणियाँ मनोरंजन तो दे सकती हैं, लेकिन इससे मुद्दा-आधारित राजनीति कमजोर होती है और वास्तविक चुनौतियाँ पीछे छूट जाती हैं।”
आगे क्या?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में नेता इस बहस पर और प्रतिक्रियाएँ दे सकते हैं। जनता की उम्मीद है कि आने वाले वक्त में राजनीतिक संवाद वापस नीतियों, योजनाओं और विकास की प्राथमिकताओं पर लौटेगा।






