
विकासनगर में जन संघर्ष मोर्चा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च न्यायालय द्वारा विभाग पर उठाए गए सवालों को लेकर शनिवार को उपजिलाधिकारी विनोद कुमार को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मांग की कि स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत को अविलंब पद से हटाया जाए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कुछ महीनों से उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। अस्पतालों में मशीनों के खराब होने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, दुर्गम क्षेत्रों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति और आपात स्थिति में उपचार न मिलने जैसे मुद्दों पर स्थानीय संगठनों ने समय-समय पर आवाज उठाई है। हाल में उच्च न्यायालय ने भी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणियां की थीं।
आधिकारिक जानकारी
जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के गैर जिम्मेदार रवैये और अधिकारियों पर नियंत्रण कमजोर होने के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में लूट-खसोट, आयुष्मान योजना के मरीजों से अतिरिक्त वसूली, गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज न मिलना, खराब मशीनों के कारण उपचार प्रभावित होना और रेफरल सिस्टम की अव्यवस्था आम बात बन गई है।
नेगी ने कहा कि उच्च न्यायालय की ओर से बार-बार अधिकारियों को तलब किया जाना यह दर्शाता है कि विभाग में गंभीर अव्यवस्था है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मोर्चा के सदस्यों का कहना है कि अस्पतालों में लगातार बढ़ती अव्यवस्थाओं के कारण आम जनता प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए कुछ लोगों ने बताया कि दुर्गम इलाकों में डॉक्टरों की तैनाती न होने से मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए चयनित अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, मशीनों की नियमित सर्विसिंग और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करना आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेफरल सिस्टम में सुधार से कई गंभीर मामलों को बचाया जा सकता है।
आगे क्या
मोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाया जाए और विभाग की अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।






