
देहरादून: शुक्रवार को कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ‘गैरसैंण माल्टा पार्टी’ का आयोजन कर हिमालयी क्षेत्रों की नीतियों, पलायन, आर्थिक मॉडल और माल्टा-नींबू की MSP बढ़ाने के मुद्दे पर जोर दिया। हरदा ने कहा कि इन फलों की विलुप्त होती प्रजातियों को बचाना और इनके समर्थन मूल्य में वृद्धि समय की बड़ी आवश्यकता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरीश रावत अक्सर अपने अनोखे आयोजनों और पहाड़ी मुद्दों पर मुखर रुख के लिए चर्चाओं में रहते हैं। इस बार उन्होंने माल्टा और नींबू जैसे हिमालयी फलों को केंद्र में रखते हुए गैरसैंण के मॉडल को फिर से राज्य और देश के सामने रखा है। गैरसैंण को वह मध्य हिमालयी क्षेत्रों की सामूहिक सोच और संतुलित विकास का प्रतीक मानते हैं।
आधिकारिक जानकारी
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हिमालयी राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर—के विकास, पलायन, सामाजिक संतुलन और आपदा प्रबंधन के लिए एक सोच आधारित नीति की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “हमारी फ्रूट बास्केट में उत्तराखंडी हिमालयी फल शामिल न होना हमारे लिए बड़ी चुनौती है।”
हरदा का कहना है कि माल्टा और नींबू की प्रजातियां तेजी से घट रही हैं, जबकि कभी ये फल गांवों की पहचान थे। उन्होंने समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की जोरदार मांग की।
MSP पर हरदा का तर्क
रावत ने कहा कि वर्तमान समर्थन मूल्य—नींबू के लिए ₹7 प्रति किलो और माल्टा के लिए ₹10 प्रति किलो—किसानों को लाभ नहीं दे पा रहे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि MSP कम से कम नींबू के लिए ₹20 और माल्टा के लिए ₹25 प्रति किलो तय की जानी चाहिए, ताकि किसान लाभ कमा सकें और इन फलों की खेती फिर से प्रोत्साहित हो सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मौजूद लोगों का कहना था कि हरदा के इस आयोजन ने माल्टा-नींबू की घटती प्रजातियों और पहाड़ी कृषि की समस्याओं पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। कुछ स्थानीय किसानों ने कहा कि समर्थन मूल्य बढ़ने से उनके लिए खेती आर्थिक रूप से अधिक व्यवहारिक हो जाएगी।
राजनीतिक पुट
धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में पहले से ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। ऐसे में हरीश रावत द्वारा इसी क्षेत्र में ‘गैरसैंण माल्टा पार्टी’ आयोजित किए जाने से सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
रावत ने कहा—“धर्म क्षेत्रे कुरु क्षेत्रे… यह क्षेत्र कर्म का क्षेत्र है। धर्मपुर विधानसभा पहली सीट होगी जहां से कांग्रेस जीत दर्ज करेगी।”
आंकड़े / तादाद
नींबू का वर्तमान समर्थन मूल्य: ₹7 प्रति किलो
माल्टा का वर्तमान समर्थन मूल्य: ₹10 प्रति किलो
हरदा का प्रस्तावित MSP: नींबू ₹20, माल्टा ₹25 प्रति किलो
आगे क्या
रावत ने उम्मीद जताई कि आने वाली सरकारें इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगी और हिमालयी फलों के संरक्षण व MSP सुधार पर ठोस कदम उठाएंगी। उनकी मांग है कि पहाड़ी कृषि को बचाने के लिए एक समग्र नीति बनाई जाए।






