
पौड़ी: जिले में लगातार बढ़ रही गुलदार की गतिविधियों के बीच गुरुवार को गजल्ड़ गांव में मंदिर से लौट रहे राजेंद्र नौटियाल की मौत ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पौड़ी और कोट विकासखंड के चयनित आंगनबाड़ी केंद्रों को 5 से 8 दिसंबर तक एहतियातन बंद रखने के निर्देश जारी किए। वहीं प्रमुख वन संरक्षक ने गुलदार को मारने के आदेश दिए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के दिनों में पौड़ी जिले में मानव–वन्यजीव संघर्ष तेजी से बढ़ा है। कई गांवों में गुलदार की गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का वातावरण बना हुआ है। गजल्ड़ गांव में हुए ताजा हमले ने इस संकट को और गहरा कर दिया, जहां मंदिर से लौट रहे एक व्यक्ति की गुलदार के हमले में मृत्यु हो गई। इससे क्षेत्र में आक्रोश, चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
औपचारिक जानकारी
घटना के बाद जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पौड़ी और कोट विकासखंड के उन आंगनबाड़ी केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद करने के आदेश जारी किए हैं, जहां गुलदार की गतिविधियां अधिक दर्ज की गई हैं। डीएम ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त गश्त बढ़ाने, ग्रामीणों को सुरक्षा दिशानिर्देश उपलब्ध कराने और बच्चों एवं बुजुर्गों को अकेले आवागमन से परहेज की सलाह देने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के आसपास कैमरा ट्रैप और पिंजरे लगाने की प्रक्रिया भी तेज करने के आदेश जारी किए गए हैं।
वन विभाग ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने गुलदार को मारने के आदेश जारी किए हैं, ताकि क्षेत्र में उत्पन्न खतरे को तत्काल नियंत्रण में लाया जा सके।
बाल विकास विभाग ने विकासखंड पौड़ी के कौडला, कफलना, बाड़ा, सिरोली, पिसोली, डोभा और वजली आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया है। इसी तरह विकासखंड कोट के देवार, उडडा, बुरांसी, देवल (चमना), काण्डा और नवन आंगनबाड़ी केंद्रों में भी इसी अवधि के लिए छुट्टी लागू की गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने कहा कि गुलदार की लगातार बढ़ती गतिविधियों से घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। माता-पिता बच्चों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई ग्रामीणों ने वन विभाग से आग्रह किया है कि गश्त बढ़ाई जाए और जोखिम वाले इलाकों में तुरंत सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।
आगे क्या?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त, निगरानी और कैमरा ट्रैपिंग बढ़ाई जा रही है। गुलदार को पकड़ने या अंतिम विकल्प में उसे मारने की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी। जिले में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से सुरक्षा उपायों पर काम कर रहा है, ताकि लोगों में विश्वास बहाल किया जा सके।






