
औली (चमोली) — सर्दियों में पर्यटकों से गुलजार रहने वाला औली इन दिनों विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की चहचहाहट से जीवंत हो उठा है। विंटर बर्ड वाचिंग सत्र के दौरान कई दुर्लभ पक्षियों के दिखाई देने के साथ ही 16 साल बाद बियर्डेड वल्चर की वापसी सबसे बड़ी खुशी का कारण बनी है। विशेषज्ञ इसे क्षेत्र की जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
औली की प्राकृतिक सुंदरता सिर्फ पर्यटकों को ही नहीं, बल्कि पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को भी आकर्षित करती रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले कई पक्षी सर्दियों में तापमान कम होने पर नीचे की ओर आ पहुंचते हैं। इस बार इन पक्षियों की अधिक संख्या में उपस्थिति ने क्षेत्र में बर्ड वाचिंग गतिविधियों को नया उत्साह दिया है। खासकर 16 साल बाद बियर्डेड वल्चर का दिखना जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधिकारिक/विशेषज्ञ जानकारी
पक्षी प्रेमी और प्रकृति विशेषज्ञ संजय कुंवर ने बताया कि औली में इस बार श्वेत कंठ कौंडिल्ला, वाइट कैप्ड रेड वाटर स्टार्ट, ग्रीन फिंच, पिंक ब्रांड फिंच, येलो ब्लू, बिल्ड मैगपाइ, ग्रे ट्री पाई, प्लेन माउंटेन फिंच, अल्पाइन चाफ, ब्लैक थ्रोटेड लाफिंग थ्रश, सैटर्न नट क्रेकर, विस्कर्ड योहाना, ससेली बेस्टैड कप विंग, स्पॉट विंग्ड ग्रॉस बीक सहित कई प्रजातियां एक साथ दिखाई दे रही हैं।
उन्होंने कहा, “16 साल बाद बियर्डेड वल्चर का दिखना न सिर्फ रोमांचक है, बल्कि यह संकेत देता है कि हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक संतुलन मजबूत हो रहा है।”
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस साल औली में पक्षियों की गतिविधि पिछले वर्षों की तुलना में अधिक दिख रही है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रत्यक्षदर्शी बर्ड प्रेमियों ने बताया कि रोज सुबह और शाम अलग-अलग प्रजातियों का एक साथ दिखना यहां के पर्यावरण की समृद्धि को दर्शाता है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रवtrend जारी रहा तो आने वाले वर्षों में औली बर्ड वाचिंग टूरिज्म के लिए बड़ा केंद्र बन सकता है। स्थानीय प्रशासन भी प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस दिशा में योजनाएं तैयार कर रहा है। क्षेत्रीय पर्यावरण टीम पक्षियों की नियमित मॉनिटरिंग जारी रखेगी।







