
देहरादून—राज्य के उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के निर्देश पर शासन ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि हड़ताल अवधि का मानदेय नहीं काटा जाएगा। हड़ताल की अवधि को अर्जित अवकाश में समायोजित किया जाएगा।
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पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर कई दिनों तक हड़ताल की थी। हड़ताल के दौरान शासन ने उनकी अनुपस्थिति दर्ज करते हुए नो-वर्क नो-पे का आदेश जारी किया था, जिससे कर्मचारियों में नाराज़गी फैल गई थी।
हड़ताल और कर्मचारियों की नाराज़गी
हड़ताल समाप्त होने पर कर्मचारियों और विभाग के बीच यह सहमति बनी थी कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी और उनकी हड़ताल अवधि का मानदेय भी नहीं काटा जाएगा। हालांकि औपचारिक शासनादेश न जारी होने से कर्मचारियों में असंतोष बना रहा।
इसी मुद्दे पर उपनल कर्मचारी महासंघ का प्रतिनिधिमंडल सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से उनके आवास पर मिला और स्थिति से अवगत कराया। महासंघ के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने बताया कि कई विभागों में कर्मचारियों का मानदेय रोका जा रहा था और कुछ मामलों में नो-वर्क नो-पे के आधार पर हटाने की कार्रवाई भी की जा रही थी।
मंत्री के हस्तक्षेप के बाद आदेश जारी
कर्मचारियों की शिकायत सुनने के बाद सैनिक कल्याण मंत्री ने अपर सचिव सैनिक कल्याण श्याम सिंह को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद शासन ने आदेश जारी करते हुए कहा कि 10 नवंबर से 25 नवंबर 2025 तक हड़ताल पर रहे उपनल कर्मचारियों की हड़ताल अवधि को अर्जित अवकाश के रूप में समायोजित किया जाएगा और मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उपनल कर्मचारियों ने शासनादेश जारी होने पर राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि हड़ताल उनकी मजबूरी थी और अब मानदेय मिलने से आर्थिक परेशानियाँ कुछ हद तक कम होंगी। साथ ही नियमितीकरण और समान वेतन की मांगों पर सकारात्मक समाधान की उम्मीद भी जताई जा रही है।
आगे क्या?
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि हड़ताल के मुख्य मुद्दों—नियमितीकरण और समान कार्य समान वेतन—पर सरकार से बातचीत जारी रहेगी। वे उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में इन मांगों पर भी उचित निर्णय लिया जाएगा।







