
पिथौरागढ़: उत्तराखंड में बेमौसम आई आपदा ने कुमाऊं मंडल को गहरे दुःख में डाल दिया है। पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट तहसील के ओझापाली गांव में सिंचाई नहर टूटने से बने तेज बहाव ने ललित मोहन जोशी के दो मंजिला मकान का हिस्सा ढहा दिया, जिसमें दबकर उनके बेटे भुवन जोशी की मौके पर ही मौत हो गई। भुवन नारायणनगर पीजी कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कुमाऊं क्षेत्र में हाल के दिनों में बेमौसम बारिश और पहाड़ी ढलानों में अस्थिरता के चलते कई ग्राम पंचायतों में जोखिम बढ़ा है। ओझापाली गांव भी इन्हीं संवेदनशील इलाकों में से एक है, जहां सिंचाई नहरों के अवरुद्ध होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है।
आधिकारिक जानकारी
सूत्रों के अनुसार, गांव से लगभग 60 मीटर ऊपर बनी सिंचाई नहर किसी कारण अवरुद्ध हो गई थी। अवरोध के कारण पानी जमा होकर अस्थायी तालाब बन गया। शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे अचानक पानी का तेज बहाव कच्ची ढलान को तोड़ते हुए गांव की ओर उतर आया।
तेज धार ने सबसे पहले ललित मोहन के मकान की पत्थर की दो मंजिला दीवार को तोड़ दिया। दीवार टूटते ही ऊपर की छत और लकड़ी के तख्ते भरभराकर गिर गए। उसी दौरान ऊपरी कमरे में सो रहे भुवन (नारायणनगर पीजी कॉलेज छात्र) मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
घटना के समय ललित मोहन, उनकी पत्नी और बेटी निचले कमरे में सो रहे थे, जिससे वे सुरक्षित बच गए। उनके भाई के घर को भी आंशिक क्षति पहुंची, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई।
भुवन के पिता ने बताया कि उनका बेटा अपनी नानी को छोड़ने गया था और कुछ दिन वहीं रुकने वाला था, लेकिन शाम को अचानक घर लौट आया। रात में पढ़ाई करते-करते वह ऊपर सो गया था।
अभी तक सिंचाई विभाग की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नहर की मरम्मत समय पर नहीं होने से इस तरह की घटनाएँ बढ़ रही हैं। गांव के लोगों ने प्रशासन से नहरों का नियमित निरीक्षण और ढलान सुरक्षा कार्य करने की मांग उठाई है।
ग्रामीण एकता मंच के संयोजक तरुण ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को तुरंत दी गई, जिसके बाद राहत कार्य शुरू हो पाए।
विशेषज्ञ टिप्पणी
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में नहरों के अवरुद्ध होने से मिट्टी का असंतुलन तेजी से बढ़ता है और अचानक बहाव घरों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। समय पर सफाई और निरीक्षण अत्यंत आवश्यक है।
आगे क्या?
एसडीएम डीडीहाट और अस्कोट कोतवाल ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा भरवाया और शव को जिला अस्पताल भेजा। तहसील प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध करा दी है। नहर के अवरुद्ध होने के कारणों की जांच शुरू हो गई है और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।





