
यमकेश्वर ब्लॉक के दस गांवों में पेयजल संकट सर्दी में भी गंभीर होता जा रहा है। बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पेयजल लाइन अब तक ठीक नहीं की गई, जिसके कारण नलों में लो प्रेशर की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट नई बात नहीं है, लेकिन यमकेश्वर ब्लॉक में स्थिति पिछले एक सप्ताह से लगातार बिगड़ती जा रही है। बरसाती सीजन में पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, परंतु नई लाइन बिछाने का कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है, जिससे कई गांवों में जलापूर्ति ठप है।
आधिकारिक जानकारी
यमकेश्वर ब्लॉक के थनूर, बोरगांव, भृगुखाल, बघेलगांव सहित 10 गांवों के लोग पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं। नलों में लो प्रेशर से घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, और घर के दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार जल संस्थान कोटद्वार से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीण भंवर सिंह ने बताया, “बीते एक सप्ताह से गांव में बहुत कम पानी आ रहा है। बार-बार शिकायत के बाद भी जल संस्थान कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।”
उधर, जल संस्थान कोटद्वार के अधिशासी अभियंता अभिषेक मिश्रा ने कहा, “भारी बारिश के कारण कुछ गांवों में पुरानी लाइन होने से दिक्कत आई है। कई गांवों में व्यवस्था ठीक कर दी गई है। नई लाइन बिछाने का प्रस्ताव शासन से स्वीकृत हो गया है और जल्द कार्य शुरू किया जाएगा।”
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि ठंड के मौसम में पानी की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन लगातार कम प्रेशर से जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी भरने के लिए उन्हें रोजाना कई बार प्राकृतिक स्रोतों तक जाना पड़ता है, जिससे पढ़ाई, खेती और महिलाओं के घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
आगे क्या?
जल संस्थान द्वारा नई लाइन बिछाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि कार्य जल्द शुरू होगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं मिला, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।






