
अठूरवाला (डोईवाला): अठूरवाला में प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में स्थानीय संघर्ष समिति का धरना मंगलवार को लगातार 16वें दिन भी जारी रहा। प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि बार-बार हटाने की चेतावनी देकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अठूरवाला क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और प्रस्तावित विस्थापन को लेकर पिछले कई दिनों से विवाद बना हुआ है। कई परिवार वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और उनका कहना है कि उन्हें स्पष्ट पुनर्वास योजना बताए बिना बार-बार हटाने की कोशिश की जा रही है। इससे ग्रामीणों में असुरक्षा और आक्रोश बढ़ रहा है।
आधिकारिक जानकारी / जिम्मेदार पक्षों का रुख
धरना स्थल पर पहुंचे सभासद प्रदीप नेगी जेटली ने प्रभावित परिवारों की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि अठूरवाला के कई परिवार तीसरी बार विस्थापन का सामना कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि बिना ठोस पुनर्वास व्यवस्था के किसी भी परिवार को नहीं हटाया जाना चाहिए।
अठूरवाला संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनजीत सजवाण ने बताया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि लगातार अनिश्चितता के माहौल के कारण ग्रामीणों में रोष बढ़ रहा है और लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
स्थानीय / मानव प्रतिक्रियाएँ
धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ी समस्या विस्थापन के बाद के जीवन की अनिश्चितता है।
एक ग्रामीण ने बताया कि “वर्षों से यहां बसे हैं। अब बिना उचित व्यवस्था बताए हटाने की बात कही जा रही है, जो सही नहीं है।”
स्थल पर आकाश, अवतार सिंह, नरेंद्र सिंह, राकेश, लक्ष्मी, ममता, हुकम सिंह, सुधा, धर्मेंद्र सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।
आगे क्या
संघर्ष समिति ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति को समझते हुए न्यायसंगत समाधान प्रस्तुत किया जाए।
दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अगले कुछ दिनों में बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।







