
देहरादून: शहर काज़ी और जमीअत उलमा-ए-हिन्द उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी की अंतिम विदाई में भारी भीड़ उमड़ी। शनिवार देर शाम दिल का दौरा पड़ने से हुए निधन के बाद रविवार सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा और जनाजा चंदरनगर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मौलाना अहमद कासमी देहरादून के प्रमुख धार्मिक नेताओं में से एक थे और वर्षों से शहर में सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनके निधन की खबर से शहर भर में शोक की लहर दौड़ गई।
अधिकारिक जानकारी
परिवार के अनुसार, मौलाना कासमी का नजीबाबाद में शनिवार देर शाम दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ। वे 75 वर्ष के थे।
सुबह से भंडारीबाग स्थित उनके आवास पर लोगों की भीड़ लगी रही। इसके बाद पलटन बाजार स्थित जामा मस्जिद में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की गई। कुछ अधिकारियों ने बताया कि शहर काज़ी के निधन से धार्मिक समुदाय को बड़ी क्षति पहुंची है। अन्य अधिकारी औपचारिक टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
जनाज़े में शामिल लोगों ने बताया कि मौलाना कासमी शहर में सौहार्द, सामाजिक एकता और धार्मिक शिक्षा के लिए सदैव समर्पित रहे।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “वे हर वर्ग के लोगों की बात सुनते थे। उनके जाने से बड़ा खालीपन महसूस हो रहा है।”
सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी शोक व्यक्त किया और कहा कि उनकी सेवाएं हमेशा याद की जाएंगी।
अंतिम यात्रा का विवरण
शहर काज़ी की अंतिम यात्रा में पलटन बाजार से चंदरनगर कब्रिस्तान तक जनसैलाब उमड़ पड़ा। भीड़ के चलते कई बार मार्ग अवरुद्ध भी हुआ। नम आंखों और गमगीन माहौल में उन्हें चंदरनगर कब्रिस्तान में दफन किया गया।
- आयु: 75 वर्ष
- स्थान: नजीबाबाद (निधन), देहरादून (जनाज़ा एवं दफन)
- प्रमुख स्थल: भंडारीबाग आवास, जामा मस्जिद पलटन बाजार, चंदरनगर कब्रिस्तान
अब आगे क्या?
धार्मिक संस्थानों और समुदाय के प्रतिनिधियों ने मौलाना के योगदान को याद करते हुए उनकी विचारधारा और सामाजिक संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की है। आने वाले दिनों में समुदाय द्वारा शोक सभाओं के आयोजन की संभावना है।







