
चमोली जिले में शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है। पंच पूजा के दूसरे दिन शनिवार दोपहर दो बजे आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए, जबकि 25 नवंबर को भगवान बदरी विशाल के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद होंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बदरीनाथ धाम में शीतकालीन व्यवस्था हर वर्ष निर्धारित परंपराओं और पंच पूजा के क्रम में की जाती है। कपाट बंद होने से पूर्व विभिन्न मंदिरों में वैदिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। नवंबर के अंतिम सप्ताह तक धाम शीतकाल के लिए विराम लेता है और देवस्थानम से संबंधित पूजा-अर्चना निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित कर दी जाती है।
आधिकारिक/धार्मिक जानकारी
शनिवार दोपहर भगवान बदरी विशाल की भोग आरती के बाद तप्त कुंड के समीप स्थित आदि केदारेश्वर मंदिर में मुख्य पुजारी बंदे रावल अमरनाथ नंबूदरी ने पके चावलों का अन्नकूट भगवान को अर्पित किया। वैदिक प्रक्रिया के तहत शिवलिंग को पके चावलों के भात से पूरी तरह ढका गया।
पूजन में धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट सहित अन्य पुजारी भी शामिल रहे। इसके पश्चात शिवलिंग को निर्वाण रूप में लाकर पुष्प व भस्म से ढका गया और दोपहर 2:00 बजे आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए।
इसके बाद 2:15 बजे आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के भी कपाट बंद कर दिए गए।
पंच पूजा का क्रम
बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि:
- 21 नवंबर (पहला दिन): विध्नहर्ता गणेश मंदिर के कपाट बंद किए गए।
- 22 नवंबर (दूसरा दिन): आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद हुए।
- 23 नवंबर (तीसरा दिन): वेद पुस्तकों की पूजा, खड़ग-पुस्तक पूजन और वेद ऋचाओं का वाचन पूर्ण कर दिया जाएगा।
- 25 नवंबर: भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि शीतकाल के पूर्व होने वाली परंपराएँ बदरीपुरी की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर हैं। श्रद्धालुओं का उत्साह मौसम की कड़ाके की ठंड के बावजूद कम नहीं हुआ है।
धाम पहुंचे भक्तों ने बताया कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति वातावरण ठंड को भी निष्प्रभावी कर देता है।
धार्मिक माहौल और मौसम
धाम में सूर्यास्त के बाद तापमान में तेजी से गिरावट और शीतलहर का असर दिख रहा है। बावजूद इसके बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और शीतकाल से पहले दर्शन का पुण्य अर्जित कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
पंच पूजा प्रक्रिया 23 नवंबर को पूर्ण होने के बाद 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के मुख्य कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद शीतकालीन पूजा-व्यवस्था जोशीमठ के पांडुकेश्वर और अन्य निर्धारित स्थानों में संचालित की जाएगी।







