
देहरादून: आयुष्मान योजना की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पताल मरीज को रेफर करने से पहले उसकी ठोस वजह बताएंगे। उन्होंने कहा कि योजना की संवेदनशीलता देखते हुए सरकारी सिस्टम की भागीदारी और मजबूत करनी होगी ताकि अधिक से अधिक लोग सरकारी अस्पतालों में ही उपचार प्राप्त कर सकें।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना राज्य में लाखों लोगों को निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान कर रही है। हालांकि हाल के महीनों में बड़ी संख्या में लाभार्थी निजी अस्पतालों में उपचार कराने पहुंचे हैं, जिससे योजना के खर्च में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय में विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की।
आधिकारिक जानकारी
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि आयुष्मान योजना जन जीवन से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण योजना है, इसलिए इसके संचालन में कोई ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार योजना में आ रही गैप फंडिंग को व्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रही है।
मंत्री ने चिंता जताई कि आयुष्मान के तहत मुफ्त उपचार के लिए बड़ी संख्या में मरीज सरकारी संस्थानों की बजाय निजी अस्पतालों का चयन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञों से लेकर आवश्यक स्टाफ की तैनाती बढ़ाई गई है और समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे में आवश्यक है कि लोग सरकारी अस्पतालों पर भरोसा कर उनका उपयोग बढ़ाएं।
उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करना सरकारी अस्पतालों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके साथ ही किसी भी मरीज को निजी अस्पताल के लिए रेफर करने की स्थिति में वहां तैनात चिकित्सा अधिकारी को स्पष्ट कारण दर्ज करना होगा। मंत्री ने कहा कि हर रेफरल की जिम्मेदारी तय की जाएगी और अनावश्यक रेफरल पर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बेहतर होने के बाद भी कई मरीज निजी संस्थानों की ओर जाते हैं। एक स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने कहा, “अगर रेफरल व्यवस्था पारदर्शी होती है और सरकारी अस्पतालों पर विश्वास बढ़ेगा, तो आयुष्मान योजना का बोझ भी कम होगा और मरीजों को समय पर सेवा मिलेगी।”
आगे क्या?
स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और अस्पतालों में सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। आने वाले हफ्तों में रेफरल प्रक्रिया, स्टाफ की तैनाती और उपचार की गुणवत्ता पर आधारित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।







