
रामनगर: विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से पर्यटकों के लिए खुशखबरी आई है। करीब सात साल बाद इस पर्यटन सीजन में एक बार फिर हाथी सफारी शुरू होने की संभावना है। इसके साथ ही पर्यटक अब वॉच टावर से जंगल और वन्यजीवों का रोमांचक दृश्य देख पाएंगे। यह कदम न केवल पर्यटन को नई दिशा देगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कॉर्बेट नेशनल पार्क, जो भारत का पहला टाइगर रिजर्व और विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव क्षेत्र है, लंबे समय से हाथी सफारी के लिए जाना जाता था। लेकिन वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत हाथियों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाई थी। इसके बाद से हाथी सफारी पूरी तरह बंद कर दी गई थी।
पिछले कई वर्षों से स्थानीय पर्यटन व्यवसायी और गाइड इस फैसले की समीक्षा की मांग कर रहे थे, ताकि हाथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित और जिम्मेदार तरीके से सफारी को फिर शुरू किया जा सके।
आधिकारिक जानकारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने जानकारी दी कि 15 नवंबर से रिजर्व का सबसे प्रसिद्ध ढिकाला जोन पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है। इसी दिन से नाइट स्टे और अन्य पर्यटन गतिविधियों की अनुमति भी मिल जाएगी।
उन्होंने कहा कि, “हमारी कोशिश है कि इस सीजन में पर्यटक हाथी सफारी का आनंद ले सकें और वॉच टावर से कॉर्बेट की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देख सकें।”
स्थानीय / मानवीय दृष्टिकोण
स्थानीय निवासी गणेश रावत ने बताया, “हाथी सफारी और वॉच टावर से दीदार की सुविधा शुरू होने से पर्यटन गतिविधियों में नई जान आएगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।”
वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यह निर्णय कॉर्बेट प्रेमियों के लिए एक बड़ी राहत है। एक प्रकृति प्रेमी ने कहा, “हाथी सफारी एक अनोखा अनुभव है — इसमें आप जंगल की आवाज़ों को करीब से महसूस करते हैं और जानवरों को बिना किसी व्यवधान के देख सकते हैं।”
आर्थिक और पर्यटन प्रभाव
ढिकाला और बिजरानी जोन में हाथी सफारी दोबारा शुरू होने से उम्मीद है कि इस बार पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों और गाइडों को लाभ मिलेगा बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन राजस्व में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
कॉर्बेट पार्क में हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं, और अब हाथी सफारी की वापसी से उनके अनुभव में एक नया रोमांच जुड़ जाएगा।
आगे की प्रक्रिया
वन विभाग ने बताया कि हाथी सफारी को नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से संचालित करने के लिए विशेष दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। इसमें पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया जाएगा।







