
ऋषिकेश। रोडवेज डिपो की बसों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। कुल 45 बसों में से करीब 11 बसें नीलामी के कगार पर पहुंच चुकी हैं। स्पेयर पार्ट्स की कमी और पुरानी बसों की जर्जर स्थिति के कारण कई वाहन रास्ते में ही खराब हो जाते हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, डिपो प्रशासन नई बसों के लिए प्रस्ताव भेजने में असमर्थ है क्योंकि परिचालन पहले से ही सीमित बसों पर टिका हुआ है।
फीसदी बसें नीलामी की स्थिति में
ऋषिकेश रोडवेज डिपो के पास कुल 45 बसें हैं, जिनमें से लगभग 25 प्रतिशत यानी 11 बसें अब नीलामी के लिए तैयार हैं। इन बसों में यूके07पीए-28… और यूके07पीए-31… सीरीज की अधिकांश गाड़ियां शामिल हैं। इन बसों ने औसतन 7 लाख किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर ली है और अब इनकी तकनीकी स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है।
स्पेयर पार्ट्स की कमी से बढ़ी दिक्कतें
रोडवेज मुख्यालय से समय पर पार्ट्स की आपूर्ति न होने के कारण इन बसों की मरम्मत में भी दिक्कतें आ रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई बार मरम्मत अधूरी रह जाती है, जिसके चलते बसें यात्रा के बीच में ही खराब हो जाती हैं। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है, बल्कि डिपो के राजस्व पर भी असर डाल रही है।
नई बसों की संख्या बेहद सीमित
डिपो में इस समय नई बसों की संख्या मात्र आठ है। ये बसें मुख्यतः पर्वतीय मार्गों पर संचालित की जा रही हैं। दूसरी ओर, पुरानी बसों को मजबूरी में देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, सहारनपुर, अंबाला, चंडीगढ़, अमृतसर, रुपैडिया और हल्द्वानी रूटों पर भेजा जा रहा है। यात्रियों ने बताया कि पुरानी बसों के चलते सफर के दौरान बार-बार देरी और तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ता है।
नई बसों की मांग अधूरी रही
रोडवेज मुख्यालय ने जुलाई 2024 में सभी डिपो से नई बसों की मांग भेजने के लिए कहा था। ऋषिकेश डिपो ने कुल 15 नई बसों की मांग भेजी थी, लेकिन उसे केवल आठ बसें ही मिलीं। इन बसों का उपयोग अब पर्वतीय रूटों पर प्राथमिकता से किया जा रहा है।
यात्रियों की परेशानी बरकरार
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि रोडवेज बसें अब सुरक्षित यात्रा का भरोसा नहीं दे पा रहीं। बार-बार खराब होने और सीटों के जर्जर हालात से सुविधा और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। यात्रियों ने सरकार और परिवहन विभाग से आग्रह किया है कि ऋषिकेश डिपो को नई बसें जल्द आवंटित की जाएं।





